सरकारी दावा 72 घंटे में पेमेंट, 10 दिन बाद भी नहीं भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। गेहूं खरीदा का सीजन शुरू होने पर सरकार दावा करती है कि गेहूं खरीदने के बाद सरकार 72 घंटे के भीतर किसानों के पैसों का भुगतान कर दिया जाएगा। पर हकीकत और कुछ है। गेहूं खरीद का काम 60 फीसदी तक निपट चुका है मगर सरकार द्वारा किए जा रहे दावे खोखले साबित हो रहे हैं। सरकार के 72 घंटे के भीतर भुगतान करने के दावों की हकीकत यह है कि 10 दिन बीतने के बाद भी उनको भुगतान नहीं किया गया है, जिसके चलते जिलाभर की मंडियों के अरबों रुपये तो कुरुक्षेत्र नई अनाज मंडी के ही 9 करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है। डीएफएससी भी समय पर यह भुगतान करने में बुरी तरह से विफल रहा है, जबकि अन्य एजेंसियों की हालत इससे भी कमजोर है। यही कारण है कि गेहूं बेचने के बाद किसान आढ़तियों के चक्कर काट रहे हैं तो आढ़ती अधिकारियों के दरवाजों पर दस्तक दे रहे हैं। ये सभी आश्वासन पर ही टिके हैं और ऐसे में ही पूरा सीजन निपट जाने की संभावना जताई जाने लगी है।
आढ़तियों की माने तो कुरुक्षेत्र नई अनाज मंडी में डीएफएससी व हैफेड ही गेहूं खरीद कर रही हैं। दोनों ही एजेंसियों का भुगतान लंबित है। हैफेड का 11 अप्रैल के बाद भुगतान नहीं हो पाया तो वहीं डीएफएससी का 13 अप्रैल तक का ही भुगतान हो पाया है। ऐसे हालात में अधिकारी भी जल्द भुगतान किए जाने के आश्वासन ही दे रहे हैं। आढ़तियों का कहना है कि यही स्थिति हर साल होती है। सरकार के वादे व दावे के अनुसार कभी भी भुगतान नहीं हो पाता है। इस बार तो स्थिति और भी कमजोर रही है। भुगतान के साथ उठान की भी ऐसी ही गंभीर समस्य.ा बनी हुई है।
बता दें कि मंडी में पांच दिन पहले अंबाला मंडल के कमिश्नर ने दौरा किया था तो इसके अगले दिन राज्यमंत्री कर्णदेव कंबोज भी जायजा लेने पहुंचे थे। जिला के अधिकारियों के अलावा कमिश्नर व राज्यमंत्री को भी भुगतान व उठान की समस्या प्रमुखता से उठाई थी। वे 72 घंटे में भुगतान का दावा करते हुए अधिकारियों का आदेश भी जारी कर गए थे। इसके बावजूद भी हालात ऐसे ही बने हुए हैं।
खुसे आसमान के नीचे पड़े 8 से 10 लाख कट्टे
नई अनाज मंडी, ब्रह्म सरोवर व सड़कों के किनारे रविवार तक करीब 8 से 10 लाख गेहूं के कट्टे उठान की राह जोह रहे हैं। उठान धीमा होने व मंडी जाम होने के कारण किसानों में मंडी का रुख करना भी छोड़ दिया है तो आढ़ती ब्रह्मसरोवर के समीप, सड़कों किनारे व खाली प्लाटों में भी गेहूं डलवा रहे हैं। जहां गेहूं की बेकद्री हो रही है।
सीजन को लेकर कोई गंभीर नहीं : वीरभान
अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान वीरभान सिंह का कहना है कि गेहूं के सीजन को लेकर कोई भी गंभीर नहीं है। यही कारण है कि मंडी में उठान से लेकर भुगतान तक की समस्या कम होने की बजाए गहराती ही जा रही है। सरकार व अधिकारी सिर्फ दावों तक ही सिमटे हुए है। मंडी में उठान की गंभीर समस्या बनी हुई है तो वहीं आज भी करीब 9 करोड़ का भुगतान अटका हुआ है, जिसके लिए अधिकारियों को बार-बार कहा जा रहा है।
हर साल हालात पहले से बदतर होते है हालात : बलविंद्र
आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व प्रधान बलविंद्र सिंह का कहना है कि मंडी में हर साल पिछले साल के मुकाबले बदतर हालात होते हैं, जिससे किसानों व आढ़तियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मंडी में आज भी डीएफएससी की ओर से 13 अप्रैल तक का ही भुगतान हो पाया है, जबकि अन्य एजेंसी की स्थिति इससे भी खराब है। सभी अधिकारियों एवं खाद्य एंव पूर्ति राज्यमंत्री कर्ण देव कंबोज को भी समस्या बताई जा चुकी है, लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकल पाया है।
छुट्टी के चलते नहीं मिल पाया भुगतान : वीरेंद्र
जिला खाद्य एवं पूर्ति अधिकारी वीरेंद्र सिंह का कहना है कि कुरुक्षेत्र मंडी का विभाग की ओर से 16 अप्रैल तक का भुगतान जारी कर दिया गया है, लेकिन शनिवार व रविवार की छुट्टी के चलते यह भुगतान आढ़तियों को नहीं मिल पाया होगा। सोमवार को 18 अप्रैल तक का भुगतान करवा दिया जाएगा। पूरे जिले में भुगतान से ज्यादा उठान की समस्या है, जो सीजन चरम पर होने से हुई है। इसके बावजूद उठान एजेंसियों को कड़े निर्देश दिए हुए हैं। कुरुक्षेत्र से करीब सवा लाख कट्टे हर रोज उठाए जा रहे हैं।