अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
देश के 574 जिलों की मिट्टी से गीता उपदेश स्थल पर श्रीकृष्ण की प्रतिमा तैयार की जानी थी। यह मिट्टी एक साल से डस्टबीन में पड़ी हुई। सरकार ने 2016 में पहली बार गीता जयंती को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित करने की परंपरा शुरू की थी। इसके साथ ही कुरुक्षेत्र में आने वाले प्रत्येक भारतवासी को यहां आकर अखंड भारत का अहसास हो, इसके लिए देश के 574 जिलों में लोगों को सरकारी खर्च पर लाने-ले जाने और उन्हें ठहराने के प्रबंध किएउ गए थे। सरकारी स्तर पर की गई इस पहल में 574 जिलों के लोगों को आमंत्रित करने का आधार गीता में भगवान श्रीकृष्ण के 574 श्लोकों को बनाया गया था।
देश के विभिन्न राज्यों के 574 लोगों को अपने साथ गीता का एक श्लोक, अपने जिले की मिट्टी, पानी और पारंपरिक वेशभूषा में आने के लिए कहा गया था। इस श्लोक को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती के दौरान अपने राज्य की पारंपरिक वेशभूषा धारण करके पढ़ा था। साथ ही अपने-अपने राज्य के जिले की मिट्टी को भी कुरुक्षेत्र में भेंट किया। आयोजकों ने तब दावा किया था कि इस यह पल इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जा रहे हैं, क्योंकि 574 जिलों की इस मिट्टी से गीता जन्मस्थली ज्योतिसर में भगवान श्रीकृष्ण की भव्य और सुंदर प्रतिमा तैयार की जाएगी। इस बात को एक साल बीत चुका है। अब आयोजकों को यह तक मालूम नहीं है कि मिट्टी कहां रखी गई है। इस मिट्टी के बारे में जब जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि हरियाणा शिक्षा विभाग की एक साइंस लैब में इस मिट्टी को बड़े-बड़े डस्टबीन में भर कर रखा गया।
एक क्विंटल 14 किलो 800 ग्राम मिट्टी से बनना है विराट स्वरूप
देश के 574 जिलों की एक क्विंटल 14 किलो और 800 ग्राम मिट्टी से भगवान श्रीकृष्ण का विराट स्वरूप तैयार कर यह प्रतिमा गीता जन्मस्थली ज्योतिसर में स्थापित होनी है। इसके लिए 25 राज्यों और सात केंद्र शासित राज्यों से 574 प्रतिनिधि 200-200 ग्राम मिट्टी लेकर आए थे। अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती 2017 में भले ही 574 जिलों के प्रतिनिधि नहीं बुलाए गए और न ही 574 श्लोक भले 574 जिलों के प्रतिनिधियों के मुख से न गूंजें, लेकिन सभी को इस मिट्टी से बनने वाली प्रतिमा का इंतजार होगा।
सर्व शिक्षा अभियान के जिला परियोजना अधिकारी अरुण आश्री के मुताबिक गीता समरस भारत विषय पर देश के 574 जिलों के प्रतिनिधियों की व्यवस्था का जिम्मा ही उनके पास था। उन्होंने बताया कि 574 जिलों की मिट्टी को दिल्ली से आए दीप ने एकत्रित किया था। विभाग से मिट्टी और पारंपरिक वेशभूषा रखने के लिए जगह मांगी गई थी। इस लिए उसे विद्यालय की साइंस लैब में सुरक्षित रखा गया है। बता दें कि इस लैब में देश के विभिन्न राज्यों के के पारंपरिक परिधान भी डिब्बों में बंद करके रखे गए हैं। इन परिधानों को पिछले वर्ष गीता जयंती आयोजन के दौरान प्रतिनिधियों ने धारण किया था। बता दें कि उस समय इन परिधानों को डिस्पले करने की बात कही गई थी। लेकिन, इनका कहा डिस्पले किया जाएगा, इसका अभी तक पता नहीं है।
इन राज्यों से पहुंचे थे इतने जिलों के लोग
आंध्रप्रदेश से छह, अरुणाचल प्रदेश से छह, असम से 48, बिहार से 39, छत्तीसगढ़ से 22, गुजरात से 27, हरियाणा से 17, हिमाचल प्रदेश से 44, जम्मू एंड कश्मीर से 47, झारखंड से 29, कर्नाटक से 17, मध्य प्रदेश से 50, महाराष्ट्र से 33, मणिपुर से पांच, उड़ीसा से 35, पंजाब से 23, राजस्थान से 20, सिक्किम से दो, तमिलनाडु से 14, त्रिपुरा से सात, उत्तराखंड से 11, उत्तर प्रदेश से 108, पश्चिम बंगाल से 24, दिल्ली से छह और अन्य प्रदेशों के साथ ही केंद्र शासित राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
वीवीआईपी भी ठहरे थे आम प्रतिनिधियों की तरह
इन प्रतिनिधियों में अपने अपने राज्यों के कई वीआईपी, उच्चाधिकारियों के परिवार के सदस्य और एकल विद्यालयों के शिक्षकों के साथ ही जबलपुर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक की पत्नी लक्ष्मी शुक्ला, जम्मू से महामंडलेश्वर स्वामी सर्वदर्शन महाराज और स्वामी दिव्यानंद सरस्वती भी आम प्रतिनिधियों की तरह कुरुक्षेत्र के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में ठहरे थे। अब इस विद्यालय की ही साइंस लैब में 574 जिलों की मिट्टी और पारंपरिक वेशभूषा रखी हुई है। उस समय इन सभी प्रतिनिधियों में इस बात को लेकर उत्साह था कि उनके द्वारा लाई गई मिट्टी से जाने-माने विशेषज्ञों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमा बनवाई जाएगी।
574 गीता प्रचारकों के अभिनंदन के लिए लगे थे तोरण द्वार
यह कार्यक्रम बहुत खास था। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हरियाणा सरकार के निमंत्रण पर आए 574 जिलों के प्रतिनिधियों के लिए पांच दिन तक ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर के प्रबंध साथ ही इन 574 गीता प्रचारकों के अभिनंदन में कुरुक्षेत्र में कई जगह तोरण द्वार लगवाए गए थे। इनके ठहरने की व्यवस्था जहां की गई थी, वहां 50 स्पेशल नए टायलेट और बाथरूम ब्लॉक बनवाए गए थे।