चैत्र चौदस मेले में लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई सरस्वती तीर्थ में डुबकी
अमर उजाला ब्यूरो
पिहोवा।
चैत्र चौदस मेले के दौरान शुक्रवार को देशभर से आए लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र सरस्वती तीर्थ में आस्था की डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान कर उनके अक्षय मोक्ष की कामना की। साथ ही प्रेत पीपल पर जल अर्पण कर उनकी प्यास बुझाई। इस दौरान प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराईं। सरस्वती पार्क में शाम को लोक कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश कर रहे हैं।
विश्व विख्यात चैत्र चौदस मेले का धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र से भी अधिक महत्व है। कुरुक्षेत्र की 48 कोस की पावन धरा पर अनेक तीर्थ स्थल स्थापित हैं, जिनका वर्णन महाभारत और पुराणों में मिलता है। कुरुक्षेत्र की परिधि में पड़ने वाले तीर्थों में सर्वाधिक महत्व पृथूदक तीर्थ का है। वामन पुराण के अनुसार वेन के पुत्र पृथू के नाम से इस तीर्थ का नाम पृथूदक हुआ। राजा वेन धर्म से विमुख हो गए थे। इस कारण ऋषियों ने उसे श्राप देकर मार दिया था। राजा पृथू के शरीर का मंथन करने पर भगवान विष्णु के नौंवे अंश पृथू पैदा हुए। राजा पृथू ने जिस स्थान पर अपने पितरों को उदक यानि जल दिया, वह स्थान पृथू-उदक यानि पृथूदक नाम से प्रसिद्घ हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस तीर्थ में स्नान का अत्यधिक महत्व है। यहां स्नान करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को अश्वमेघ यज्ञ की फल की प्राप्ति के साथ स्वर्गलोक मिलता है। तीर्थ के किनारे किया कोई भी पाप-पुण्य का 13 गुणा फल मिलता है।
चैत्र चौदस का महत्व
ऐसी मान्यता है कि यहां पिंडदान करने से पितरों को अक्षय मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार पांडवों के बड़े भाई युधिष्ठिर ने महाभारत के युद्घ में अपने सगे संबंधियों का पिंडदान यहीं किया था। भगवान कृष्ण और शिव के अलावा गुरु नानक देव और गुरु गोबिंद सिंह जी भी यहां आए थे। महाराजा रणजीत सिंह इसी तीर्थ पर अपनी माता का कर्मकांड कराने आए। आज भी यह प्रथा जारी है।
400 साल तक का रिकॉर्ड है दर्ज
पिहोवा के तीर्थ पुरोहितों के पास 300 से 400 वर्ष पुराना तक रिकॉर्ड मौजूद है। पिहोवा के तीर्थ घाट पर पहुंचते ही यात्रियों से पुरोहित उनके पूर्वजों के पिछले निवास स्थान और उनकी जाति के बारे में पूछते है। इसे सोशल मीडिया के माध्यम से सभी पुरोहितों के पास भेज दिया जाता है। नाम और यात्रियों की वंशावली मिलने पर उसे यात्रियों को उनके पूर्वजों के नाम और हस्ताक्षर दिखाए जाते हैं। साथ ही भविष्य के लिए उनके परिवार के सभी सदस्यों के नाम लिख कर हस्ताक्षर करवा लिए जाते हैं। यह भी उनके रिकॉर्ड का एक हिस्सा बन जाता है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी किसी वंशावली को याद रखना संभव नहीं होता, लेकिन इन बहियों के माध्यम से इसे जाना जा सकता है। इनके अतिरिक्त प्राचीन राजा, महाराजाओं ने अपने मंत्रियों और कुल पुरोहितों द्वारा भेजे गए दान का भी वर्णन यहां मिलता है।
व्हाट्सएप्प ग्रुप ने मिलाया पुरोहित-यजमानों को
मेले में व्हाट्सएप्प ग्रुप पुरोहितों और यजमानों को मिलाने का जरिया बन गया। पुरोहित वर्ग ने राम-राम जी और यात्री पर्ची ग्रुप बनाया था। इसमें यात्रियों के नाम, जाति और स्थान की जानकारी भेजी जाती थी। जानकारी मिलने पर यात्रियों को उसके पुरोहित के पास भेज दिया जाता था।
कार्तिकेय को चढ़ाया तेल
सरस्वती तीर्थ स्थित स्वामी कार्तिकेय मंदिर में श्रद्धालुओं ने तेल चढ़ाकर अपने पूर्वजों के मोक्ष की कामना की। यहां भगवान कार्तिकेय पिंडी रूप में विराजमान है। मंदिर में अखंड ज्योति जल रही है। दावा किया जाता है कि इसे भगवान कृष्ण के कहने पर युधिष्ठिर ने महाभारत युद्घ में वीरगति को प्राप्त हुए योद्धाओं के कर्म पिंड करवाने के बाद प्रज्जवलित किया था। तब उन्होंने स्वामी कार्तिकेय को तेल और सिंदूर चढ़ाया था। आज भी यह प्रथा जारी है। तीर्थ पर कर्म पिंडदान कराने आए श्रद्धालु कार्तिकेय पर तेल जरूर चढ़ाते हैं।
विभिन्न संस्थाओं ने लगाए भंडारे
मेले में आए श्रद्धालुओं के लिए नगर की विभिन्न संस्थाओं ने भंडारे लगाए। फर्नीचर मार्केट में चल रहे भंडारे के आयोजक मोहन लाल, अशोक कुमार, रिंकू चावला ने बताया कि वे पिछले कई सालों से यहां भंडारा लगा रहे है। सुबह से देर रात तक यहां भंडारा लगाया जाता है।
श्रद्धालु ने जमकर की खरीददारी
देश भर से आए लाखों श्रद्धालुओं ने मेला क्षेत्र में लगी दुकानों से जमकर खरीददारी की। दुकानदारों ने बच्चों के लिए प्लास्टिक, लकड़ी और लोहे से बनाए आकर्षक खिलौने रखे हुए थे। हर दुकान पर खिलौने खरीदने और देखने वालों की भीड़ लगी रही।
मंदिरों में होता रहा कीर्तन
मेले में आए यात्रियों के लिए विभिन्न धार्मिक संस्थाओं ने भजन कीर्तन का आयोजन किया। सरस्वती तीर्थ, अनाज मंडी सहित कई मंदिरों में श्रद्धालुओं ने भजनों का खूब आनंद लिया।
श्रद्धालु ने दिया ईमानदारी का परिचय
गुरुग्राम निवासी कैलाश ग्रोवर ने एक पर्स में मिले 14 हजार रुपये लौटाकर ईमानदारी का परिचय दिया। कैलाश ग्रोवर को तीर्थ के पास से एक पर्स में 14 हजार रुपये मिले थे। उन्होंने सूचना केंद्र में आकर सूचना प्रसारित करवाकर पर्स के मालिक त्रिलोक चंद को उसे लौटा दिया। रोपड़ से आए विजय शर्मा का पर्स मेला क्षेत्र किसी ने निकाल लिया। उन्होंने बताया कि वे पूजा करवाने तीर्थ पर आए थे। इसी दौरान किसी ने उनका पर्स निकाल लिया। उसमें करीब 20 हजार रुपये और कागजात पड़े थे।
अमावस आज
आज अमावस पर भी तीर्थ पर अंतिम स्नान होगा। विशेषकर दिल्ली से श्रद्धालु तीर्थ पर पहुंचेंगे। बता दें पापमोचिनी एकादशी पर हिमाचल प्रदेश के हजारों श्रद्धालु सरस्वती तीर्थ पर पहुंचे थे। तभी से मेले का आगाज हो गया था। प्रशासन ने 15 मार्च से मेले का शुभारंभ किया था।