दादुपुर नलवी नहर के लिए राष्ट्रपति से मिला भाकियू का प्रतिनिधिमंडल
अमर उजाला ब्यूरो
शाहाबाद।
भाकियू का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को दादुपुर नलवी नहर के लिए नई दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिला। मंडल ने हरियाणा सरकार के दादुपुर नलवी नहर को डिनोटिफाई करने के लिए कानून को संशोधित करने और इस कानून को इजाजत न देने की मांग की। इसी मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला और शाहाबाद के पूर्व विधायक अनिल धंतौडी भी राष्ट्रपति से मिले। उन्होंने भी नहर के पक्ष में अपनी बात रखी।
भाकियू के प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय कोर समिति के सदस्य एवं भाकियू के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी, प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस, संगठन सचिव हरपाल सुडल, जसबीर सिंह मामूमाजरा, हरकेश खानपुर, दलबीर सुडल, जसविंद्र सुडैल शामिल रहे। भाकियू की ओर से एक मेमोरेंडम राष्ट्रपति को सौंपा गया। इसमें कहा गया कि हरियाणा सरकार के दादुपुर नलवी नहर को डिनोटिफाई करने के बाद बनाए जाने वाले कानून को मंजूरी प्रदान न की जाए। ज्ञापन में कहा गया कि नहर बंद करना कोई समाधान नहीं है। वैसे भी कुरुक्षेत्र जिले के सभी ब्लॉक डार्कजोन में हैं। इनमें किसान ट्यूबवेल नहीं लगवा सकते। ऐसे में खेती कैसे हो पाएगी, कैसे सिंचाई होगी, कैसे भूमिगत जलस्तर ऊपर आएगा। उन्होंने कहा कि कुछ वर्षों बाद भूमिगत जल खत्म हो जाएगा तो उत्तरी हरियाणा रेगिस्तान बन जाएगा। उन्होंने कहा कि यह उत्तरी हरियाणा ही नहीं, देश-प्रदेश के अन्न के भंडार भरने में सबसे ज्यादा योगदान देता है। खेती की वजह से लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। मेमोरेंडम में मांग की गई कि नहर को चालू रखा जाए। बारिश के मौसम में भी हर महीने में तीन या चार बार नहर में पानी छोड़ा जाए, जिससे किसान नहरी पानी से सिंचाई कर सकें। इससे भूमिगत जल बचेगा।
दूसरी ओर राष्ट्रपति से भेंट के बाद पूर्व विधायक अनिल धंतौडी ने बताया कि उन्होंने इस विषय पर उन्हें पूरी जानकारी दी है। बताया है कि उनके नेतृत्व में 51 दिन शाहाबाद में क्रमिक अनशन और धरना दिया गया था। जनहित में इस कानून को मंजूरी न दिए जाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने उनकी बात ध्यान से सुनी और आश्वासन दिया कि सभी चीजों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाएगा।