गरीब बच्चों को नियम 134-ए के तहत दाखिला दिए जाने से लेकर इन स्कूलों के लिए जारी नियमों की पालना करने के लिए निजी स्कूल आखिरकार तैयार दिखाई देने लगे हैं। यह सब अपनी मर्जी से नहीं बल्कि डीसी द्वारा जिलेभर के निजी स्कूल संचालकों व प्रिंसिपल को लगाई गई फटकार का ही परिणाम है। जिससे ये स्कूल सरकार द्वारा निर्धारित सभी नियमों की पालना करने को मजबूर हो गए।
हां तक कि किस स्तर तक इन नियमों की पालना की जा रही है, इससे भी शिक्षा विभाग को इन स्कूलों द्वारा शपथ पत्र देकर अवगत करवाना पड़ रहा है। दाखिलों से लेकर बसों में भी बरती जा रही मनमानी को लेकर अभिभावकों व प्रशासन के निशाने पर आए जिलेभर के 80 से अधिक स्कूल विभाग को शपथ पत्र जमा करवा चुके हैं, जिनमें नियमों की पालना किए जाने का हवाला दिया जा रहा है।
हालांकि डीसी द्वारा बरती गई सख्ताई के बाद लगभग 10 दिनों के अंतराल में ही जिलेभर के 170 निजी स्कूलों में से आधे स्कूलों ने विभाग को यह पत्र दिए हैं जबकि जल्द ही शपथ पत्र न देने वाले बाकी स्कूलों को शिक्षा विभाग ने नोटिस जारी किए जाने का निर्णय लिया है, जिसके बाद सीधे कार्रवाई की जाएगी। जिला में अधिकतर निजी स्कूल वर्तमान सत्र की शुरुआत से ही नियमों को ताक पर रख मनमानी कर रहे थे।
जहां स्कूलों में बच्चों को दाखिला देने के नाम पर अधिक फीस वसूली जा रही थी तो वहीं किताबें व वर्दी भी मनमानी दुकानों पर उन्हें खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा था। यहां तक कि बच्चों को घर से स्कूल व स्कूल से घर लाने वाली बसों में भी नियमों को ताक पर रखा जा रहा था। अभिभावक इन स्कूलों की मनमानी की शिकायत शिक्षा विभाग से लेकर जिला उपायुक्त को लगातार कर रहे थे जबकि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर बनी कमेटी ने जिला के कई निजी स्कूलों की बसों की जांच की तो नियमों की अवहेलना की पोल खुलकर सामने आई थी।
ऐसे हालात में जब शिकायतों का अंबार लगा तो जिला उपायुक्त ने 20 अप्रैल को पंचायत भवन में जिलेभर के निजी स्कूलों की बैठक ली थी, जिसमें नियमों की पालना करने के सख्त आदेश दिए थे तो वहीं उनकी ओर से लिखित में शपथ पत्र विभाग को दिए जाने के निर्देश भी दिए थे। इसके बाद इन स्कूलों पर असर दिखाई दिया, जिसके चलते जिलेभर में स्थित 170 स्कूलों में से आधे से अधिक स्कूलों ने शिक्षा विभाग को शपथ पत्र जमा करवाए है। जिसमें सभी नियमों का हवाला देते हुए उन पर खरा उतरे जाने का दावा किया जा रहा है। उधर एक निजी स्कूल संचालक ने बताया कि उन्हें प्रशासन जानबूझ कर परेशान करने पर उतरा हुआ है। सभी स्कूल नियमों अनुसार ही चलाए जा रहे हैं।
डीसी व डीईओ बदले जाने से खुशी
निजी स्कूलों को नियमों की पालना कड़ाई से करवाए जाने का मन बना चुके तत्कालीन डीसी सीजी रजिनीकांतन व जिला शिक्षा अधिकारी सुमन आर्य, दोनों का ही तबादला हो चुका है, जिससे निजी स्कूल संचालकों में कुछ राहत दिखाई पड़ रही है। एक स्कूल संचालक का कहना है कि अधिकारियों के कड़े रुख से स्कूलों में दाखिलों पर असर पड़ने लगा था।
कल डीसी लेंगे शिक्षा अधिकारियों की बैठक
जिला उपायुक्त राज नारायण कौशिक जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों की 4 मई को बैठक लेंगे। जिसमें वह वर्तमान समय में शिक्षा के चल रहे हालात की जानकारी लेंगे। वह पूर्व उपायुक्त व डीईओ द्वारा अब तक शिक्षा को लेकर किए गए कार्यों की समीक्षा भी करेंगे। इस दौरान उपायुक्त विशेष तौर पर नियम 134-ए के तहत दाखिलों को विशेष केंद्र बिंदू बनाएंगे तथा आवश्यक दिशा-निर्देश भी देंगे।
परीक्षा की जांच में जुटे रहे शिक्षक
निजी स्कूलों में नियम 134-ए के तहत निर्धारित 10 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चों को दाखिला दिए जाने के लिए रविवार को परीक्षा का आयोजन किया गया था, जिसमें लगभग 2900 बच्चों को रोल नंबर बांटे गए थे, लेकिन लगभग 650 बच्चों ने यह परीक्षा ही नहीं दी। 2250 बच्चों द्वारा दी गई इस परीक्षा के मूल्यांकन के लिए राजकीय वरिष्ठ मॉडल स्कूल में केंद्र बनाया गया। जहां पर सभी बीईओ की देखरेख में परीक्षा के उतर पत्रों की जांच की गई। जिसके बाद सभी बीईओ की ओर से परिणाम जिला शिक्षा विभाग को जमा करवाया गया।
बता दें कि थानेसर ब्लॉक में सबसे अधिक 1109 आवेदन आए थे जबकि शाहबाद में 850, बाबैन में 227, पिहोवा में 359 व लाडवा में 429 बच्चों ने कक्षा दूसरी से लेकर 12वीं तक के लिए आवेदन किए थे। 11वीं कक्षा के लिए अभी आवेदन नहीं लिए गए है, जो 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम की इंतजार में लटकाए हुए हैं। शिक्षा विभाग को भरसक प्रयासों के बाद 134-ए के तहत निर्धारित सीटों की संख्या जिला भर के स्कूलों से लगभग 5700 सीटों की संख्या हासिल हुई थी, जिन पर गरीब बच्चों को दाखिला दिया जाना है।
नहीं हो पाया रिकॉर्ड का मिलान, दुविधा में रहा विभाग
प्रवेश के लिए ली गई परीक्षा के बाद कक्षा अनुसार सभी खंड शिक्षा अधिकारियों की ओर से परिणाम विभाग को सौंप दिया गया, जिसके साथ ही कक्षा अनुसार विवरण दिया गया। लेकिन यह विवरण इन्हीं शिक्षा अधिकारियों द्वारा पहले दिए गए विवरण से मेल नहीं हो पाया, जिससे विभाग दुविधा में फंस गया। देर सायं तक मिलान करने में विभाग के कर्मचारी जुटे रहे।
5 को होगा ड्रॉ
रविवार को ली गई परीक्षा व इसकी सोमवार को किए गए मूल्यांकन के बाद ड्रॉ 5 मई को होगा। इस ड्रॉ में उन बच्चों को ही शामिल किया जाएगा, जो 55 फीसदी व इससे उपर अंक हासिल करने में कामयाब होंगे। यह परीक्षा उन बच्चों की ली गई, जो पहले से निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं जबकि सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को पिछली कक्षा में पिछले चार माह के रिपोर्ट कार्ड के आधार पर ही दाखिला प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
शपथ पत्र न देने वाले स्कूलों को भेजेंगे नोटिस : डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी उमा शर्मा ने बताया कि निजी स्कूलों द्वारा दिए जा रहे शपथ पत्रों को रिकॉर्ड के तौर पर रखा जा रहा है। स्कूलों की समय-समय पर जांच की जाएगी और खामियां पाए जाने पर इन शपथ पत्रों को आधार बनाया जाएगा। जो स्कूल यह पत्र जल्द जमा नहीं करवाएंगे, उन्हें नोटिस भेजा जाएगा। जिसका भी जवाब न दिए जाने पर सीधे तौर पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि नियमों की पालना तो हर हालत में करनी ही होगी और विभाग इसके लिए कड़ी निगरानी बनाए रखेगा।