अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
शासन-प्रशासन और आमजन को बंद कमरों में भी इन दिनों सर्दी जरूर लगती होगी। धर्मनगरी में बेसहारा वर्ग के ऐसे अनेक दुधमुंहे बच्चे, महिलाएं, किशोर और बुजुर्ग है, जो कड़ाके ठंड में आसमां को छत और सड़क को ही बिछौना समझ कर रोजाना सो जाते हैं। हालांकि ऐसे सीजन में कमरा बंद कर रजाई ओढ़ कर सोने वाले सर्दी बेहाल रहते है। यह बदहाली तब है, जबकि यहां नर सेवा नारायण सेवा का संदेश वातावरण में गूंजता रहता है। धर्मनगरी का प्रशासन छह दिन के सांस्कृतिक आयोजन के लिए पांच करोड़ रुपये का पंडाल, लाइट एंड साउंड सिस्टम तो लगा सकता है, लेकिन गरीबों को आसरा नहीं दे सकता। पांच करोड़ का पंडाल लगाने वाले इसी कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के दफ्तर में 2013 से जरूरतमंद और बेसहारा लोगों का रैन बसेरा स्थापित करने की फाइल धूल फांक रही है। यह हकीकत तब सामने आई जब अमर उजाला की टीम रात एक बजे से मध्य रात्रि ढाई बजे तक रैन बसेरों की हकीकत जानने के लिए मौके पर पहुंची। ठिठुरन भरी कड़ाके की इस सर्दी में बेसहारा लोग कैसे रात गजारते हैं, इस हकीकत को अमर उजाला के कैमरे में कैद किया।
इस दौरान टीम के सदस्यों को शहर के कई इलाकों में लोग सड़क के किनारे सोते हुए मिले। इसी साल रेलवे स्टेशन के निकट फ्लाईओवर के नीचे स्थापित किए गए रैन बसेरे को देखा तो वहां गेट पर स्ट्रे डाग सोते दिखे। इसके गेट पर ताला भी लगा मिला। इस रैन बसेरे के गेट से 100 कदम की दूरी पर खुले आसमान के नीचे एक साल का मुन्नू, उसकी मां, बहन और परिवार के अन्य सदस्य सो रहे थे। रात करीब डेढ़ बजे गश्त कर रही एक पेट्रोलिंग टीम के सदस्य मुकेश कुमार और शमशेर सिंह से रैन बसेरा के बारे में पूछा तो उन्होंने ताला चेक करने के बाद कहा कि शायद केयरटेकर यहां नहीं है।
ताला खुला होता तो सड़क किनारे ना सोते
मुन्नू का परिवार छत्तीसगढ़ के बिलासपुर का रहने वाला है। वह कुरुक्षेत्र के गोल बैंक के निकट पुराने कपड़े बेचते हैं। इनमें 20 वर्षीय चंदा, 20 वर्षीय काजल, 20 वर्षीय नीलू, 30 वर्षीय पूजा, 30 वर्षीय सोनू, 30 वर्षीय सुनीता, 50 वर्षीय निर्मला और बोबड़ी शामिल हैं। यदि नगर परिषद के अधिकार क्षेत्र के रैन बसेरे पर ताला जड़ा ना होता तो शायद यह लोग सड़क किनारे रात नहीं गुजारते।
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कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड को बनवाने में अहम रोल अदा करने वाले भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री एवं केडीबी के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे गुलजारी लाल नंदा की प्रतिमा के नीचे एक दो या तीन नहीं, बल्कि आठ लोग खुले आसमान के नीचे सोते हुए मिले।
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भारत रत्न नंदाजी की समाधि सदाचार स्थल की दीवार दीवार के साथ और इसी के ठीक सामने सड़क के बीच डिवाइडर पर ग्रीन बेल्ट में छह लोग सोते मिले।
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पैनोरमा विज्ञान केंद्र की दीवार के साथ छह लोग सो रहे थे।
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श्रीकृष्ण संग्रहालय की दीवार के साथ 30 लोग ठंड में सिकुड़ते हुए मिले।
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गोरखनाथ मंदिर मार्केट की दुकानों के बाहर छह लोग सो रहे थे।
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अर्जुन चौक के निकट बड़ के पेड़ के नीचे 10 लोग ठंड से बचने का प्रयास कर रहे थे।
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रेलवे स्टेशन के फ्लाई ओवर के निकट सड़क पर करीब 30 लोग ठंड में कांपते हुए सो रहे थे।
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फ्लाईओवर के नीचे इसी साल बनाया गया रैन बसेरे पर ताला जड़ा मिला।
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फ्लाईओवर के नीचे रैन बसेरा पर लगे ताले की जांच करती पुलिस पेट्रोलिंग टीम के सदस्य
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रैन बसेरे से चंद कदम की दूरी पर सड़क किनारे छत्तीसगढ़ बिलासपुर के परिवार के 10 सदस्य सोते हुए मिले।
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जरूरत के समय रात को ताला और दिन में खोला गया रैन बसेरे का दरवाजा।
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इसी साल रैन बसेरे के उद्घाटन का पत्थर।
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डेढ माह पहले परिषद को दिया जिम्मा : मलिक
जिला रेडक्रास सचिव कुलबीर सिंह मलिक के मुताबिक डेढ़ माह पहले तक रैन बसेरों की व्यवस्था रेडक्रॉस के पास थी। डेढ़ माह पहले हरियाणा सरकार ने प्रदेशभर के सभी रैन बसेरों का जिम्मा नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं को सौंप दिया।
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24 जनवरी 2017 को स्थापित किया था रैन बसेरा
रेडक्रॉस ने 24 जनवरी 2017 को करीब 20 लाख रुपये बजट खर्च कर रेलवे स्टेशन के निकट फ्लाईओवर के नीचे रैन बसेरा स्थापित किया था। इसके लिए एक समाजसेवी परिवार ने भी 11 लाख रुपये दान दिए थे।
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इंसानियत के नाते सड़कों से उठाने का है फर्ज
रेडक्रॉस के सचिव कुलबीर सिंह मलिक के मुताबिक 2016 तक रैन बसेरा जिला रेडक्रॉस भवन में था। इस दौरान सर्दी में यदि कोई फुटपाथ या खुले आसमान के नीचे सोता मिलता था, तो उसे रेडक्रॉस के वाहन से निकट की धर्मशाला या रेडक्रॉस भवन स्थित रैन बसेरे में लाया जाता था।
2013 में आधा एकड़ भूमि हो चुकी है मंजूर
हरियाणा सरकार ने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की मेला क्षेत्र की भूमि में से आधा एकड़ भूमि रैन बसेरे के लिए 2013 में जारी की जा चुकी है। इस भूमि पर बड़ा रैन बसेरा ब्रह्मसरोवर के निकट मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर के समीप स्थापित किया जाना था। अब तक यह रैन बसेरा फाइलों में दबा हुआ है।
40 महिलाओं और 80 पुरुषों के ठहरने का है प्रबंध : ईओ
नगर परिषद के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर बीएन भारती के मुताबिक रेलवे स्टेशन के रैन बसेरा में दो कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं। रैन बसेरा में 40 महिलाओं और 80 पुरुषों के ठहरने का प्रबंध किया गया है। रैन बसेरे में बिस्तर, टॉयलेट और बाथरूम की व्यवस्था की गई है।
पोर्टा केबिन मंगाने की है योजना
कड़ाके की सर्दी में खुले आसमान के नीचे सोने वालों को रेडक्रॉस की तरह उठाकर सुनिश्चित स्थान पर पहुंचाने का क्या प्रबंध है? इसके उत्तर में थानेसर नगर परिषद के एग्जीक्यूटिव आफिसर बीएन भारती का कहना है कि फिलहाल नगर परिषद के पास ऐसे लोगों को उठाकर रैन बसेरा या धर्मशाला तक पहुंचाने का कोई प्रबंध नहीं है। लेकिन, थानेसर नगर परिषद ब्रह्मसरोवर और रेलवे स्टेशन पर पोर्टा केबिन मंगाने की योजना पर विचार कर रही है। एक पोर्टा केबिन में 30 से 40 लोग सो सकते हैं।
नोएडा की कंपनी से किया है संपर्क
थानेसर नगर परिषद ने दो पोर्टा केबिन ब्रह्मसरोवर और एक पोर्टा केबिन रेलवे स्टेशन पर बनाने के अलावा आवश्यकतानुसार अन्य जगहों के लिए नोएडा की एक कंपनी से संपर्क करने का दावा किया है। हालांकि, अभी तक जो व्यवस्था नग परिषद के हाथों में है, उसका लाभ भी जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा।
राजभवन का ये है फैसला, सीईओ ने कहा जानकारी नहीं
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के प्रबंधक मंडल की 79 वीं बैठक शुक्रवार 28 जून 2013 को हरियाणा राजभवन चंडीगढ़ में राज्यपाल और केडीबी के अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई थी। इसमें घर विहीन लोगों की सुविधा के लिए नाइट शेल्टर बनाने के लिए आधा एकड़ भूमि आवंटन का फैसला लिया गया था। यह फैसला 11 जुलाई 2011 को हरियाणा के मुख्यमंत्री के उस फैसले पर लिया था। इसमें सभी जिला मुख्यालयों पर बेघर लोगों के लिए नाइट शेल्टर के लिए उचित कदम उठाए जाने की रूपरेखा तैयार की गई थी। राजभवन में 28 जून 2013 को हुई बैठक में इस विषय पर उपमंडल अधिकारी थानेसर (कुरुक्षेत्र) की ओर से प्राप्त प्रस्ताव पर नाइट शेल्टर के निर्माण के लिए बिना किसी लाभ हानि के मूल्य पर लीज की सामान्य शर्तों पर ब्रह्मसरोवर पर स्थित मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर के साथ लगती आधा एकड़ भूमि प्रदान करने की स्वीकृति दी गई थी।