करनाल। सरकार ने प्रदेशभर के फर्जी बीपीएल कार्ड धारकों पर फिर से शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जून माह के बाद अब जुलाई की शुरुआत में ही जिले में हजारों लोगों के बीपीएल राशन कार्ड कटने की संभावना है। अब 150 सीसी की बाइक (डेढ़ से ढाई लाख तक कीमत) व सालाना 30 हजार रुपये से ज्यादा की बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ता भी बीपीएल श्रेणी से बाहर होंगे। जिले में दो सप्ताह में करीब पांच हजार ऐसे कार्ड धारकों पर कार्रवाई हुई है जो पात्र की श्रेणी में नहीं आते लेकिन फिर भी राशन ले रहे थे।
इससे पहले परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में चार पहिया, तीन पहिया वाहन, 400 गज से ज्यादा जमीन परिवार के नाम होने पर बीपीएल कार्ड कटने के संदेश मोबाइल के माध्यम से प्राप्त हुए थे। सरकार की ओर से इस बारे में बार-बार हिदायत दी जा रही है कि जो बीपीएल कार्ड के लिए पात्र नहीं है वह स्वतः अपना कार्ड सरेंडर कर दें अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। जनवरी से अभी तक करनाल में 30 हजार से ज्यादा राशन कार्ड काटे जा चुके हैं।
खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से सरकार पर करीब सालाना एक करोड़ से ज्यादा वित्तीय नुकसान से बचाव का अनुमान है। नागरिक संसाधन सूचना विभाग (सीआरआईडी) की ओर से किसानों की ओर से हर छह माह में बेची जाने वाली फसल, उनके नाम जो कृषि व गैर कृषि योग्य जमीन है उसका ब्योरा, परिवार की आमदनी किन-किन संसाधनों से कितनी-कितनी है, परिवार का कोई सदस्य सालाना आयकर रिटर्न भरता है या नहीं, जानकारियों से संबंधित डाटा जुटाया जा रहा है। इस जानकारी से पीपीपी में स्वतः एक परिवार की आमदनी बढ़ने लगेगी और उसको सरकार की ओर से दी जाने वाली बीपीएल, आयुष्मान व हैप्पी कार्ड की सुविधा कट जाएगी।
यदि परिवार के मुखिया की ओर से आयकर रिटर्न तीन लाख से ज्यादा भरी जाती है तो सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से लाभार्थी को दी जाने वाली विभिन्न श्रेणियों की पेंशन कट जाएगी। इसी डर से कार्ड धारक आयकर भरने से कतराने लगे हैं। संवाद