करनाल जिले के सवा सौ से अधिक कैंसर पीड़ितों को योग से जीने की आस बंधी हैं। दवाइयों के साथ योग को अपनाने वाले इन मरीजों की हालत में तेजी से सुधार आया है। 21 जून को पूरा विश्व योग दिवस के रूप में मनाने जा रहा है। इसके लिए विश्व स्तर से लेकर ग्राम स्तर तक योग अभ्यास की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इन कैंसर पीड़ित मरीजों ने भी योग अभ्यास में जमकर पसीना बहाया है। ये समाज के लिए योग के सकारात्मक परिणामों का एक नमूना भी हैं।
जिले में अब तक करीब सवा सौ से अधिक कैंसर के मरीज योग की कक्षा में पहुंचे हैं, जो पिछले करीब आठ से दस सालों से दवाइयों के साथ योग कर रहे हैं। इन मरीजों से सबसे अधिक संख्या महिलाओं की है, जो स्तन कैंसर, लीवर कैंसर व ओवरी कैंसर से पीड़ित हैं। इसके बाद तंबाकू व शराब के सेवन करने से इस बीमारी की चपेट में आने वाले पुरुषों की संख्या है, लेकिन इलाज के साथ जिन मरीजों ने योग को अपनाया है, उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ है।
योग शारीरिक क्रिया ही नहीं, जीने का सलीका भी
योग अपनाकर स्वस्थ हुई रीतू, परमेश्वरी, राजबाला, अमरेंद्र सिंह व राजीबीर ने बताया कि योग केवल शारीरिक क्रिया तक सीमित नहीं है। यह तो जीने का एक सलीका है। इसमें खाने, पीने व सोने लेकर उठने व बैठने की विधियां भी बताई गई हैं। यदि व्यक्ति अपने जीवन में इन विधियों को अपना ले तो वह बीमारियों से बच सकता है। उन्होंने बताया कि अपने सिस्टम में कैंसर-कोशिकाओं की संख्या को घटाने के सबसे आसान तरीका में योग व उपवास है। दरअसल कैंसर कोशिकाओं को सामान्य कोशिकाओं के मुकाबले कहीं ज्यादा भोजन की आवश्यकता होती है। इन्हें करीब 30 फीसदी ज्यादा भोजन चाहिए। यदि कैंसर पीड़ित व्यक्ति उपवास रखता है तो इससे भी काफी हद तक राहत कैंसर की बीमारी पर रोक लग सकती है।
वर्जन
आधुनिक समय में सबसे अधिक बीमारियां लोगों को खानपान की वजह से होती हैं। यदि योग को अपनाया जाए तो इस प्रकार की बीमारियों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। जिले में करीब सवा सौ से अधिक कैंसर के मरीज हैं, जिनकी योग से हालत में सुधार आया है। इसके अलावा सरवाइकल, घुटनों का दर्द आदि बीमारियों से सैकड़ों लोगों राहत मिली है।
- राजीव बंसल, पतंजलि योग पीठ के डॉक्टर।