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मेडिकल कालेज में कोरोना मरीजों को कराया जा रहा प्राणायाम

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कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज में दाखिल कोरोना मरीजों को सुबह और शाम प्राणायाम कराया जा रहा है। यही प्राणायाम मरीजों में प्राण का संचार कर रहा है। दवा के साथ योग का ही असर है कि करनाल में मरीजों की रिकवरी रेट 82 प्रतिशत तक पहुंच गया है। डाक्टरों का मानना है कि जब से ये योग और प्राणायाम शुरू कराया है, उसके सकारात्मक परिणाम आए हैं। इससे न केवल मरीजों का तनाव कम हुआ है, बल्कि बीमारी से लड़ने के लिए उनका उत्साह भी बढ़ा हैं। इसी का परिणाम है कि कोरोना के मरीजों के ठीक होने का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
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मार्च माह से मेडिकल कालेज में कोरोना के मरीजों को दाखिल किया जा रहा है, लेकिन सरकार द्वारा उस समय इसे कोविड अस्पताल घोषित नहीं किये जाने के कारण मरीजों को शाहाबाद के आदेश और एमएम मुलाना मेडिकल कालेज में भेजा जाता रहा है। पिछले माह ही सरकार द्वारा कल्पना चावला मेडिकल कालेज को कोविड अस्पताल घोषित किया गया। इस समय कल्पना चावला मेडिकल कालेज में 50 के करीब कोरोना के मरीज दाखिल हैं, जबकि औसतन 50 अन्य सदिग्ध मरीज दाखिल रहते हैं, जो सैंपल देने के लिए आते हैं। राहत की बात ये है कि अब लगातार मरीज ठीक हो रहे हैं। डाक्टर इसके पीछे योग और प्राणायाम का भी तर्क दे रहे हैं। कोरोना मरीजों का इलाज करने वाले डा. अमरजीत सिंह, डा. आदित्य चौधरी, डा. लुकवेंद्र सिंह बताते हैं कि कोरोना वायरस का संक्रमण होने के बाद कई बार मरीज अकेलेपन के कारण ज्यादातर तनाव या डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में जब से योग और प्राणायाम शुरू कराया गया है, तभी से इसके सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं। सुबह शाम डा. संयम गौड़ मरीजों को प्राणायाम कराते हैं। पिछले एक सप्ताह से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या प्रतिदिन 30 के करीब है। बता दें कि मेडिकल कालेज में गंभीर या फिर उन मरीजों को दाखिल किया जाता है, जिनको कोरोना के लक्षण हों। वहीं नीलोखेड़ी के गुरुकुल में बनाए गए कोविड केयर सेंटर में उन मरीजों को दाखिल किया जाता है, जिनको लक्षण नहीं होते।
जल्दी ठीक हो रहे मरीज : डा. डागर
कोविड-19 के नोडल आफिसर डा. अभिनव डागर ने बताया कि सुबह शाम कोरोना के मरीजों को प्राणायाम और योग आसान कराए जा रहे हैं। इसके लिए समय तय है। अच्छी बात ये है कि मरीज भी इसमें काफी रुचि ले रहे हैं। इस दौरान मरीजों को इस बात के लिए मोटीवेट भी किया जाता है कि कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि हौसले से लड़ने की जरूरत है।
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