दो एकड़ के गांव मटौर में महज दो एकड़ के जमींदार कृष्ण कुमार व उषा देवी के घर जन्मी मनीषा मौण ने अपने पंच के बल पर पूरे परिवार सहित गांव का भी नाम रोशन किया है। उसके पिता व परिवार के लोग अब उसके घर पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं।
मनीषा के पिता ने बताया कि वे गांव मटौर के मूल रुप से रहने वाले हैं। इस समय डिफेंस कालोनी में रह रहे हैं। 1986 में वह कैथल में रहने के लिए आ गए थे। यहां पांच साल तक ट्रेक्टर एजेंसी में काम किया। फिर ट्रेक्टर मार्केट में अपनी ट्रेक्टर रिपेयर की दुकान चला रहे हैं। उसकी दो बेटियां हैं। जिसमें बडी बेटी निशा की शादी कर दी। बेटा विकास अभी विदेश जाने की तैयारी कर रहा है। सबसे छोटी बेटी मनीषा ने बॉक्सिंग में खूब नाम कमाया है। उसने हरियाणा स्तर पर 17 गोल्ड मेडल जीते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर 5 गोल्ड मेडल सहित करीब 17 देशों की यात्रा कर अनेकों गोल्ड मेडल जीते हैं। उसकी बेटी अब ओलंपिक के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। उन्हें पूरा विश्वास है कि वह अपने भार वर्ग में ओलंपिक में भारत का नाम रोशन करेगी। इस समय वह ओलंपिक की तैयारियों में जुटी है। पूरे परिवार को उसके गोल्ड जीतने पर खुशी है। वह संभवत: सोमवार को भारत पहुंचे। रविवार को ही जर्मनी से रवाना हुई है। मनीषा एशियन चैंपियनशिप, वल्र्ड चैंपियनशिप, आइबा ओपन टूर्नामेंट सहित अनेकों मुकाबले जीत चुकी है। भारत की ओर से ओलंपिक कार्यक्रम के तहत पहले पटियाला में आयोजित कैंप में वह भाग लेकर अब विदेश में तैयारियां कर रही थी।
मनीषा के कोच गुरमीत सिंह ने कहा कि मनीषा शुरू से ही प्रतिभाशाली खिलाड़ी रही है। उसमें हर खेल को जीतने का जज्बा रहता है। उसकी मेहनत का परिणाम है कि अब उसने जर्मनी में नाम रोशन किया है। उससे ओलंपिक में पदम की पूरी उम्मीद है।
घर में मेडलों से सजी है दीवार-मनीषा के घर मेें एक दीवार मनीषा के मेडलों से सजी है। पूरी दीवार पर मेडल टांगने की जगह नहीं बची है। जिसे देखकर मनीषा की उपलब्धियों का पता चलता है।