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Karnal News: परिवार की खुशहाली और मन्नत पूरी होने पर महिलाओं ने रखा व्रत

Sun, 26 Oct 2025 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। छठ पर्व पर केवल पूजा या व्रत नहीं रखा जाता बल्कि मन्नत भी मांगी जाती है। महिलाओं का कहना है कि वह अलग-अलग कारणों से छठी मैया का व्रत रख रही हैं। किसी ने संतान की खुशहाली की कामना की तो किसी ने मन्नत पूरी होने के पर धन्यवाद करने के लिए रखा है व्रत। हर महिला इस व्रत को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा मानती हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच की यह तपस्या महिलाओं के भीतर विश्वास, अनुशासन को और मजबूत करती है। महिलाओं ने बताया कि इस त्योहार का मकसद खास कर औलाद और धन संपत्ति के लिए होता है लेकिन अपनी मन्नत और खुशी के लिए भी व्रत को धारण किया जाता है। घर की बड़ी महिलाएं जब बहू या बेटियों को यह व्रत सिखाती हैं तो केवल नियम नहीं, बल्कि भक्ति का भाव भी सिखाती हैं।
हर साल छठ मैया की करतीं हैं पूजा
सेक्टर-6 निवासी अनीता ने बताया कि उन्हें उनकी सास ने यह व्रत दिया था जब वह शादी के दो साल बाद मां बनीं थी। तब से हर साल छठ मैया की पूजा करती आ रही हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पोती काफी समय से बीमार चल रही थी। जिसके लिए मइया से मन्नत मांगी थी कि अगर वह ठीक हो जाए तो उसके नाम से व्रत रखूंगी। अब वह स्वस्थ हैं, तो व्रत की खुशी चार गुना अधिक हो गई है। यह व्रत केवल नियम नहीं, भावना से जुड़ा होता है।
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परिवार की सुख-शांति के रखा व्रत
सराफा बाजार निवासी कुंदन देवी ने बताया कि वह दो साल से छठ का व्रत रख रही हैं। शादी के बाद से सास ने उन्हें छठ व्रत सौंपा, जिसमें इस बार औलाद और घर की सुख-शांति के लिए व्रत रखा है। उन्होंने बताया कि शादी से पहले अपनी माता को व्रत करता देख खुशी हुआ करती थी, लेकिन अब स्वयं व्रत का पालन कर खुशी होती है। यह व्रत केवल पूजा ही नहीं भावनाओं को भी अंदर समाए हुए है।
इस बार बहू को दिया छठ का व्रत
मीरा देवी ने बताया कि वह पिछले 35 साल से छठ का व्रत रख रही हैं। उन्होंने बताया कि वह इस बार से अपनी बहू को यह व्रत दे रही हैं, लेकिन परिवार की सुख शांति के लिए वह अपनी बहू के साथ व्रत रख रही हैं। मीरा का कहना है कि यह व्रत परिवार की एकता को भी मजबूत करता है, जिसमें सास-बहू का रिश्ता मजबूत है। पीढ़ी से अगली पीढ़ी यह व्रत चलता है ताकि आने वाली नई पीढ़ी भी इस व्रत की महत्ता को समझ सके।
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बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना
ज्योति ने बताया कि वह 12 साल से व्रत रख रही हैं। यह व्रत हमें संयम, अनुशासन और निष्ठा सिखाता है जो सीख भी देता है की मन की शक्ति सबसे बड़ी शक्ति होती है। उन्होंने बताया कि उनकी सास बीमार रहने लगी थी तो शादी के तीन साल बाद उन्हें यह व्रत मिला था। अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य व कामना के लिए यह व्रत रखा है।
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