महिला किसानों के 45 सदस्यीय दल को आईआईडब्ल्यूबीआर के वैज्ञानिकों ने दिया आधुनिक खेती का प्रशिक्षण, लोकगीतों पर नृत्य कर प्रस्तुत की संस्कृति की झलक
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। उत्तराखंड सरकार की कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से जिला योजना के तहत खासकर महिला किसानों को कृषि की नवीनतम तकनीकें सिखाने के लिए करनाल के अनुसंधान केंद्रों में प्रशिक्षण दिलाया गया। महिला किसानों को भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) में गेहूं और जौ की नई और अधिक पैदावार वाली किस्मों को उगाने का प्रशिक्षण दिया गया। इस मौके पर महिलाओं ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में अपने राज्य के लोकगीतों पर नृत्य कर उत्तराखंड की जौनसारी संस्कृति की झलक प्रस्तुत की।
उत्तराखंड के देहरादून जिले के कालसी, विकास नगर व सहसपुर विकास खंड क्षेत्र के 45 सदस्यीय महिला किसानों का दल आईआईडब्ल्यूबीआर पहुंचा है, यहां किसानों को वैज्ञानिक खेती के तरीके सिखाए जा रहे हैं। वैज्ञानिकों ने नई और अधिक पैदावार वाली गेहूं व जौ की किस्मों की जानकारी देने के साथ ही यहां से बीज कैसे प्राप्त कर सकते हैं, ये भी समझाया। खेतों पर ले जाकर किसानों को विभिन्न किस्मों के ट्रायल दिखाए गए, उन्हें जहरमुक्त खेती के ट्रायल दिखाते हुए प्राकृतिक खेती करने को प्रेरित किया गया। किसानों ने यहां पर संस्थान के पार्क में पहुंचकर अपनी पारंपरिक वेशभूषा में उत्तराखंड राज्य के विभिन्न लोक गीतों पर नृत्य कर अपनी संस्कृति से लोगों को परिचित कराया। महिला किसानों के सवालों के वैज्ञानिकों ने जवाब भी दिए।
इसके बाद किसानों ने राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के कृषि विज्ञान केंद्र जाकर खेती के आधुनिक तरीके सीखे। सरिता देवी के नेतृत्व में आकृति, सोनाली, ममता, कृष्णा देवी, रेखा, सुनीता, संतो आदि कई महिला किसान इसमें शामिल रहीं। उनके साथ सहसपुर कालकी विकास खंड के दसवीर सिंह तोमर, पूर्णानंद पैनुली आदि भी थे।