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Karnal News: विश्लेषणात्मक प्रश्नों को हल करने में लगा अधिक समय

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- सामाजिक विज्ञान की परीक्षा देकर लौट रहे विद्यार्थियों ने बताए अनुभव
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं की सामाजिक विज्ञान की परीक्षा मंगलवार को आयोजित की गई। सेक्टर-13 स्थित ओपीएस विद्या मंदिर में परीक्षा देने आए विद्यार्थियों ने परीक्षा देने के बाद केंद्र से बाहर आकर अपनी प्रतिक्रियाएं व अनुभव साझा किए। कई विद्यार्थियों ने पेपर को संतुलित और आसान बताया, जबकि कुछ के लिए समय प्रबंधन चुनौतीपूर्ण रहा। विद्यार्थियों ने बताया कि परीक्षा में मानचित्र कार्य, लघु उत्तर और विश्लेषणात्मक प्रश्नों की वजह से अलग-अलग तरह की कठिनाइयां आईं। उनके अनुसार, पेपर का कठिनाई स्तर मध्यम रहा और सिलेबस के अनुरूप था। हालांकि, कई विद्यार्थियों को उत्तर पूरे करने में परेशानी हुई, क्योंकि पेपर काफी बड़ा था।


मानचित्र लगा चुनौतीपूर्ण
मानसी बताती है कि पेपर बहुत संतुलित था। इतिहास और राजनीति शास्त्र के प्रश्न सीधे एनसीईआरटी से थे, लेकिन मानचित्र थोड़ा चुनौतीपूर्ण लगा। हालांकि, जिन छात्रों ने अच्छी तैयारी की थी, उनके लिए यह परीक्षा आसान रही होगी। कुल मिलाकर पेपर आसान था, लेकिन कुछ ज्यादा अंकों वाले प्रश्नों को पूरा करना थोड़ा कठिन रहा जिसमें अधिक समय लगा। अर्थशास्त्र के कुछ प्रश्नों में गहराई से विश्लेषण करना था, जिससे उत्तर लिखने में अधिक समय लगा।
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अर्थशास्त्र के प्रश्न थे आसान
सोनम ने बताया कि भूगोल और अर्थशास्त्र के प्रश्न सरल थे, लेकिन राजनीति शास्त्र के कुछ प्रश्नों में अधिक मेहनत करनी पड़ी। समय की कमी के कारण आखिरी सेक्शन जल्दबाजी में पूरा करना पड़ा। इतिहास के कुछ प्रश्नों में तारीखें और घटनाओं की तुलना करने के लिए अधिक विश्लेषण की जरूरत थी। मानचित्र कौशल आधारित प्रश्न भी उम्मीद से कठिन था, लेकिन बाकी प्रश्न आसान थे।

दो-दो अंकों वाले प्रश्न लगे सरल
तानिया ने बताया कि पेपर का स्तर मध्यम था। कुछ प्रश्न सीधे अरिहंत और एनसीईआरटी से आए थे, लेकिन कुछ केस स्टडी प्रश्नों ने सोचने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा अति लघु स्तरीय प्रश्नों से काफी आसानी हुई जोकि बहुत सरल थे व 2-2 अंकों वाले थे। साथ ही 20 अंकों के बहुविकल्पीय प्रश्न होने से अंकों की बढ़ोत्तरी होने के आसार हैं। तानिया बताती है कि जो पढ़ा था उसी के अनुरूप प्रश्न आए।
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दीर्घ स्तरीय प्रश्नों में विकल्प मिलने से हुई सहूलियत
रेनू के अनुसार पेपर का भूगोल व अर्थशास्त्र का भाग काफी सरल रहा। केंद्र से बाहर आकर दूसरे पेपर सेट देखे तो लगा कि सभी सेटों में से सेट ए काफी सरल है, जिसमें आसान प्रश्न आए। उन बच्चों को काफी फायदा हुआ होगा जिसके पास सेट ए आया होगा। रेनू बताती हैं कि दीर्घ स्तरीय प्रश्नों में विकल्प मिलने से काफी सहूलियत हुई जिससे हमें अपनी मर्जी अनुसार आसान प्रश्न को चुनकर उत्तर दे पाए।
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