कोरोना संकट कॉल के दौरान जहां लोगों का रोजगार ठप है, खाने पीने की दिक्कत है तो वहीं जिले की डिपो होल्डर्स द्वारा वितरित किए जाने वाला पौष्टिक खाद्यान्न की सार्वजनिक वितरण व्यवस्था भी गड़बड़ाने लगी है। शहर के जुंडला गेट क्षेत्र में डिपो होल्डर द्वारा गरीबों को खराब आटा दिए जाने से गुस्साए उपभोक्ताओं ने पार्षद के आवास पर हंगामा कर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आटा की बजाय गेहूं देने की मांग की। साथ ही गर्मी के मौसम में बाजरा वितरित करने के औचित्य पर भी सवाल खड़े किए।
हरियाणा सरकार द्वारा पायलेट प्रोजेक्ट के तहत 2017 में प्रदेश के करनाल व अंबाला जिले में कार्डधारक गरीबों को गेहूं के साथ साथ आटा देना शुरू किया था। यह प्रोजेक्ट लगातार यहां चल रहा है। पिछले कुछ समय से विभिन्न विटामिन व मिनरल मिश्रित खाद्यान्न उपलब्ध कराने की दिखा में बाजरा, मस्टर्ड ऑयल आदि कई वस्तुएं भी उपलब्ध कराई जाती है, ताकि एनीमिया व कुपोषण आदि की समस्या से निपटा जा सके। लेकिन डिपो की लापरवाही कहें या फिर फ्लोर मिलद्वारा आपूर्ति करने में की जा रही गड़बड़ी माने लेकिन जुंडला गेट में डिपो से जो आटा दिया गया है, उसे उपभोक्ता राशनकार्डधारक खराब बता रहे हैं। जिसे लेकर मोहल्ले की कई महिलाएं रविवार को पार्षद युद्धवीर सैनी के आवास पर पहुंची। सरिता, सरोज आदि कई महिलाओं का आरोप है कि यह आटा खराब है, जिसे खाने से परिजनों को उल्टियां शुरू हो गई हैं। आटे में कीड़े पड़ने लगते है, यह आटा कुछ समय में काला हो जाता है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि बाजरा गर्म होता है, जिसे गर्मी में नहीं खाया जा सकता है तो बाजरा दिए जाने का क्या औचित्य है। करनाल शहरी क्षेत्र में में 4000 क्विंटल सहित जिलेभर में बड़ी संख्या में बाजरा दिया गया है। बाजरा बंद किया जाए। आटे के स्थान पर गेहूं दिया जाए, ताकि उसे साफ करके सुविधानुसार पिसाई कराकर उसका उपयोग किया जा सके।
-आज तो छुट्टी है, कल डिपो होल्डर से बात की जाएगी। बाजरा देने के पीछे सरकार की क्या मंशा है, यह तो समझ से परे है। सरकार को आटा देने की बजाय गेहूं ही देना चाहिए, क्योंकि आटा अधिक दिन तक रखा नहीं जा सकता, जबकि गेहूं को घर में भी रोका जा सकता है।
-युद्धवीर सैनी, पार्षद जुंडला गेट करनाल।
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-विटामिन-मिनरलयुक्त खाद्यान्न देने की मंशा के तहत ही बाजरा व अन्य खाद्य सामग्री दी जा रही है, इसका फायदा भी प्रदेशभर में लोगों को हुआ है। रही बात आटे की तो हैफेड का फ्लोर मिलों से अनुबंध होता है, हैफेड आटा उपलब्ध कराता है। आटा खराब है तो उसे बदल दिया जाएगा और हैफेड प्रबंधक से इसकी शिकायत करते हुए जांच भी कराई जाएगी। मौके पर टीम भेजकर भी जांच कराकर रिपोर्ट के आधार पर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यदि उपभोक्ता गेहूं लेना चाहते हैं तो सरकार तक बात पहुंचाई जाएगी।
-निशांत राठी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति नियंत्रक करनाल।