अगस्त महीने में शहर से सब्जी मंडी शिफ्टिंग होने के डीसी के दावे हवा
हवाई साबित हुए। इससे लाखों शहरवासियों की उम्मीदों को झटका लगा है। अगस्त
और सितंबर तो चला गया अक्टूबर भी शुरू हो गया है, लेकिन मंडी को शिफ्ट नहीं
किया जा सका है। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि जल्द ही मंडी को शहर से शिफ्ट
कर दिया जाएगा, लेकिन यह दावे अभी हकीकत से कोसों दूर हैं। काम की स्पीड
यही रही तो अगले साल ही यह कार्य हो पाएगा।
खास बात यह है कि मुख्यमंत्री
के टॉप 10 प्रोजेक्ट में शामिल इस प्रोजेक्ट को लेकर खुद डीसी के पास कोई
जवाब नहीं है। अमर उजाला की टीम ने अधिकारियों के इस दावे की सच्चाई को
जानने के लिए नई सब्जी मंडी में पहुंचकर स्थिति का मुआयना किया। यहां
पहुंचकर स्थिति साफ हो गई कि किस प्रकार अधिकारी सीएम को भी गलत जानकारी
देने में गुरेज नहीं कर रहे और न ही दावे करने में पीछे हट रहे हैं। पुरानी
सब्जी मंडी को फिलहाल शहर से शिफ्ट नहीं किया जा सकता। चूंकि इसके लिए अभी
कोई प्रशासन की प्लानिंग ही नहीं है।
हाल यह हैं कि नई सब्जी मंडी में
फड़ी वालों के लिए जो 10 शेड और फड़ियां लगाने के लिए 150 फड़ लाखों रुपये
खर्च करके तैयार किए थे। अब उन्हीं स्थानों को फिर से तुड़वाया जा रहा है।
इन फड़ों को तुड़वाकर फिर से लाखों रुपये की लागत से कार्य कराया जाएगा।
ऐसे में सवाल यह उठाता है कि आखिरकार इस लाखों रुपये की बर्बादी का
जिम्मेदार आखिर कौन है? इस मामले में अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। कोई
भी अधिकारी इस मामले पर बोलने के लिए तैयार नहीं है। प्रशासन की इस
लापरवाही के चलते आए दिन लोग जाम से जूझ रहे हैं। पुरानी सब्जी मंडी के 500
मीटर एरिया पार करने में 20 मिनट का समय लग जाता है।
अगस्त में किया था मंडी शिफ्टिंग का वादा
शहर
से सब्जी मंडी शिफ्ट करके अनाज मंडी में बनाई गई नई सब्जी मंडी को चालू
अगस्त महीने के अंत में हर हाल में शुरू कर दिया जाएगा। खुद डीसी डॉ. जे
गणेशन ने मुख्यमंत्री के समक्ष इस बात का दावा किया था। दरअसल करनाल से
सब्जी मंडी को शिफ्ट करने की योजना मुख्यमंत्री की योजनाओं में से एक है।
मुख्यमंत्री जब भी करनाल में आए अधिकारियों ने उन्हें गुमराह करते हुए
एक-दो दिन, एक-दो महीने का समय मांग, जो आज तक पूरा नहीं हो पाया है।
बनाए शेड और स्थान को तोड़ने की नौबत क्यों
दरअसल
प्रशासन ने नई सब्जी मंडी में शेड के नीचे फड़ी वालों के लिए जो स्थान
बनाए थे, वह बेहद छोटे थे। इनमें फड़ी वाले नहीं बैठ सकते हैं। ऐसे में यदि
मंडी को शिफ्ट कर दिया जाता तो प्रशासन की लापरवाही फिर सामने आती। बहरहाल
इसी कारण लाखों रुपये की कीमत से तैयार इन फड़ी के स्थानों को प्रशासन ने
तोड़ दिया, लेकिन यदि बनाने से पहले ही जगह देख ली जाती तो लाखों रुपया
बर्बाद होने से बच जाता।
साढ़े 8 करोड़ के हुए थे टेंडर
सब्जी
मंडी में शेड निर्माण, सड़क निर्माण व अन्य कार्यों के लिए अप्रैल महीने
में साढ़े 8 करोड़ के टेंडर हुए थे। निर्माण कार्य जून में पूरा किया जाना
था। इस राशि से 100 फीट चौड़े व 400 मीटर लंबे शेड का निर्माण किया जाना
था, जो अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। मंडी में अब तक बिजली-पानी की
व्यवस्था भी सही तरीके से पूरी नहीं हो पाई है। बहरहाल अधिकारियों के दावे
हकीकत में आज तक नहीं बदल पाए हैं। सवाल यह है कि आखिर पहले क्यों इतने
छोटे फड़ बनाए गए और इन पर आया खर्च के लिए जिम्मेदार कौन है?
डीसी से सवाल और जवाब
सवाल : सब्जी मंडी अगस्त में शिफ्ट होनी थी, आपने भी दावा किया था। अक्टूबर शुरू हो गया है, लेकिन अभी तक नहीं हुई?
जवाब :- इसमें अभी कुछ समय लगेगा, सब्जी मंडी शिफ्ट कर दी जाएगी?
सवाल :- मंडी में बनाई गई करीब 150 फड़ों को तोड़ दिया गया है?
जवाब :- हमें दुकानदारों ने कहा कि जगह छोटी पड़ रही है, उनकी डिमांड पर ही इन्हें तोड़कर फिर से बनाया जा रहा है?
सवाल :- इसमें जो लाखों रुपये का नुकसान हुआ, उसका जिम्मेदार कौन होगा?
जवाब :- मैं जो बता रहा हूं वही है, इससे ज्यादा कुछ नहीं है।