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घंटाकर्ण देव दरबार में पूरी होती हैं मुरादें : पीयूष मुनि

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घंटाकर्ण देव दरबार में पूरी होती हैं मुरादें : पीयूष मुनि - फोटो : घंटाकर्ण देव दरबार में पूरी होती हैं मुरादें : पीयूष मुनि
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श्री घंटाकर्ण महावीर तीर्थस्थान इंद्री रोड पर भक्ति संगम का आयोजन
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। श्री घंटाकर्ण महावीर देवता के विशेष कृपा दिवस कृष्ण चौदस पर मंगलवार को श्री घंटाकर्ण महावीर तीर्थस्थान इंद्री रोड पर भक्ति संगम आयोजित किया गया। इस मौके पर संत पीयूष मुनि महाराज ने कहा कि श्री घंटाकर्ण देव दरबार में सच्चे मन से आने वाला मुंहमांगी मुरादें पाता है। ये अतिशय प्रभावी, अलौकिक शक्तिसंपन्न, भक्तवत्सल देव है जो नौ निधियों और बारह सिद्धियों से परिपूर्ण करते हैं।
सुबह श्री घंटाकर्ण बीजमंत्र के सामूहिक जाप से लोकमंगल और कल्याण की कामना की गई। इसके बाद मुनि संयमेश, मुनि अभिनव, साध्वी जागृति, विनय जैन, पवन जैन, रीटा जैन, पुष्पा गोयल, रवि जैन, विनेश जैन ने भक्ति गीतों से समां बांधा। इसमें जब प्रभु आते हैं सारी खुशियां लाते हैं, सारे प्रेम नाल बोलो जयकारा दादा दा जिहड़ा प्रेम नाल बोले ओह प्यारा प्रभु दा आदि भजनों पर लोग भाव विभोर हो गए।
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इसके बाद प्रवचन किया गया। इसमें संत गौरव पीयूष मुनि महाराज ने कहा कि श्री घंटाकर्ण जी बावन वीरों में तीसवें वीर शिरोमणि और वीरों की परिषद में सेनापति का गौरवमयी स्थान प्राप्त प्रभावशाली देवता हैं जिन्हें जैन, हिंदू और बौद्ध तीनों परंपराओं में आराध्य स्थान प्राप्त है। जैन परंपरा में इन्हें चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर का शासनरक्षक देव माना जाता है।
वैदिक परंपरा में इन्हें बद्रीनाथ तीर्थ का क्षेत्रपाल देवता, शिवजी का गण और उनके पुत्र कार्तिकेय का अभिन्न सहयोगी माना जाता है। मंत्र शास्त्रों में श्री घंटाकर्ण के मंत्रों और साधना-विधियों का उल्लेख मिलता है जो मनोरथ पूर्ति, संकल्प सिद्धि, भय निवारण, शारीरिक कष्ट मुक्ति, भूत-प्रेत संबंधित बाधा निवारण, राजकीय संकट से छुटकारा पाने में रामबाण औषधि के समान कार्य करती हैं।
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इनकी भक्ति पूर्वक उपासना करने से सारे मनोरथ पूर्ण होते हैं और जीवन का पथ विघ्न-बाधाओं से रहित होकर सुखों की ओर बढ़ता है। बौद्ध परंपरा की मान्यता है कि श्री घंटाकर्ण जी को अनुकूल किए बिना मंत्र यंत्र और तंत्र की कोई साधना सफल नहीं होती। मुख्य आरती और प्रीतिभोज की सेवा का लाभ मनीष जैन-श्रुति जैन की ओर से रहा। सारा दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी चहल-पहल रही।
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