माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। गांवों में इन दिनों कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। एक सप्ताह से रोजाना ग्रामीण क्षेत्रों से 30 से लेकर 55 प्रतिशत तक नए मामले सामने आ रहे हैं। वहीं पहली लहर में कोरोना को हराने के लिए संजीवनी बनीं आयुष डिस्पेंसरियों पर अब ताले लटके हैं। पिछली बार यहीं से मिलने वाली औषधियों और इम्यूनिटी बूस्टर के दम पर ही ग्रामीण कोरोना से लड़े और सामान्य बीमारियों का इलाज भी मिला। अब करीब एक माह से बंद डिस्पेंसरियों के कारण ग्रामीण इलाज के लिए या तो शहर का रुख कर रहे हैं या फिर गांवों के झोल छाप डॉक्टरों से दवाएं ले रहे हैं। जोकि कोरोना के दौर में सबसे ज्यादा खतरनाक है।
विभाग की ओर से इन डिस्पेंसरियों के डॉक्टरों को स्वास्थ्य विभाग के पास भेजकर होम आइसोलेटेड मरीजों के फोन पर हाल पूछने के लिए लगाया गया है। आयुष विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि गांव स्तर पर यदि किसी छोटी दिक्कत का इलाज मिल जाए तो वह सबसे सुरक्षित है। टीम अपने स्तर मरीजों की जांच भी कर सकती है। यदि किसी में कोरोना के लक्षण मिलेंगे तो इसकी जानकारी भी स्वास्थ्य विभाग से शेयर की जा सकती है। वहीं प्रत्येक ग्रामीण तक आयुष किट भी पहुंचाई जा सकती है। जिले में 29 डिस्पेंसरियां हैं, जहां जिले की करीब 9 लाख ग्रामीण आबादी को आयुर्वेदिक दवाओं और योग के माध्यम से इलाज दिया जाता है।
1400 के करीब होती थी ओपीडी, अब मरीज इलाज के लिए भटक रह
जिले की कुल 29 आयुष डिस्पेंसरियों में रोजाना औसतन 50 ओपीडी होती थी यानी 1400 से अधिक लोग रोजाना इन डिस्पेंसरियों में पहुंचते थे। रोजाना कई ऐसे मरीज जो अस्पताल तक नहीं पहुंच पाते थे ।वे शुरुआत में ही खांसी, बुखार, जुकाम, जोड़ों का दर्द, दस्त, उल्टी व चर्म रोग आदि बीमारियों का इलाज कराने यहां पहुंचते थे। अब इन लोगों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।
लोग बोले, शहर जाना मजबूरी, डिस्पेंसरी खुले तो मिले राहत
अरड़ाना के अमित, पधाना के लक्ष्य और स्टौंडी गांव के विवेक का कहना है कि इलाज के लिए उन्हें शहर जाना पड़ रहा है। जोकि कोरोना के इस दौर में सबसे ज्यादा खतरनाक है। सरकार वैसे तो लोगों को घर रहने के लिए कह रही है। सामान्य बीमारी पर भी उन्हें दवा गांव में नहीं मिल रही है। अस्पतालों में भीड़ के कारण कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा है। कई बार डिस्पेंसरी तो खुलती है, लेकिन चतुर्थ श्रेणी का स्टाफ ही मिलता है।
अब तो मेडिकल छात्र कर रहे कॉलिंग, आयुष डॉक्टरों को भेजें डिस्पेंसरी
करनाल में होम आइसोलेट कोविड मरीजों का हाल जानने के लिए 200 मेडिकल छात्रों की टीम लगाई है। जिससे आयुष डॉक्टरों के काम का बोझ कम हुआ है। एडवोकेट संदीप राणा का कहना है कि ऐसे में इन डॉक्टरों को यदि आधे दिन के लिए भी डिस्पेंसरी खोलने के लिए भेज दिया जाए। तो ग्रामीणों को काफी राहत मिलेगी।
इन गांवों में हैं डिस्पेंसरी
जिले में गांव स्टौंडी, बरसत, कलसौरा, सुभरी, डबकौली, सेक्टर-6, शाहपुर, शाहजहांपुर, गोंदर, कालरों, सावंत, बरथल, सग्गा, शेखूपुरा मंचूरी, राहड़ा, खेड़ी सर्फली, कोहंड, अराईंपुरा, रंबा, घीड़, चौगांवा, गढ़ी बीरबल, दरड़, अरड़ाना, रंधौली व कैमला गांव में आयुष डिस्पेंसरी है। प्रत्येक डिस्पेंसरी में एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, ट्रेंड दाई और दो सेवादार का स्टाफ है।
छह जून तक के लिए स्वास्थ्य विभाग को देनी हैं सेवाएं
सरकार के आदेश पर ही आयुष विभाग के स्टाफ को स्वास्थ्य विभाग में सेवाओं के लिए भेजा गया है। हमारी टीम वहां होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों की फोन पर हाल जानने संबंधित कार्य कर रही है। छह जून तक अभी स्टाफ वहीं रखने के आदेश हैं। वहीं जो स्टाफ फील्ड में जा रहा है, वे लोगों को आयुष किट भी बांट रहे हैं। यदि सरकार आदेश देगी तो डिस्पेंसरी खुल सकती हैं। -डॉ. सतपाल, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी करनाल।