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आशियाना टूटा तो डीसी के घर का घेराव करने पहुंचे प्रदर्शनकारी

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करनाल। अवैध कॉलोनियों में बनाए गए मकानों को तोड़ने के विरोध में वहां के निवासियों का आक्रोश फूट पड़ा। कुंजपुरा रोड, नेवल, घरौंडा आदि पर अवैध कॉलोनियों में जिनके घर तोड़े गए, वे लोग रविवार को कार्यालय बंद होने के कारण उपायुक्त के आवास का घेराव करने पहुंचे लेकिन पुलिस ने उससे पहले ही उन्हें रोक दिया। उन्होंने वहीं रोड पर धरना शुरू कर दिया। यह मामला तब शांत हुआ जबकि इन सभी को एसडीएम से मिलवाया गया और एसडीएम ने आश्वासन दिया कि इस पूरे मामले की तहकीकात की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।
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इन प्रदर्शनकारियों के आक्रोश को देखते हुए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बुलानी पड़ी। प्रदर्शनकारी उपायुक्त से मिलकर अपना मांग पत्र देना चाहते थे। बाद में उपायुक्त के सिक्योरिटी इंचार्ज से कहा कि उनकी रजिस्टरी भी है तो फिर क्यों उनको परेशान किया जा रहा है। इन सभी का कहना था कि जिनके घर टूटे हैं उनको मुआवजा दिया जाए। इन सभी ने अपने मकान की रजिस्टरी भी दिखाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनको नोटिस दिया जाना चाहिए था लेकिन सीधे ही अधिकारी आए और उनका मकान तोड़ दिया। इन प्रदर्शनकारियों में कई सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे। जिसमें महमद पुर, रिंदल, मुकापुरी, करनाल, घरौंडा, इंद्री और जुंडला के लोग शामिल रहे।
यह प्रदर्शनकारी सभी डीसी से मिलकर इस मामले के बारे में पूरी जानकारी देना चाहते थे। निवासियों के गुस्से को देखते हुए डीसी कार्यालय के सामने पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। प्रदर्शनकारियों को डीसी आवास तक पहुंचने के पहले ही रोक लिया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और कहा कि जब तक मसले का हल नहीं निकालेगा, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।
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प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि कॉलोनी अवैध है तो उनकी रजिस्टरी कैसे हो गई ? उन्होंने कहा कि उनको बिजली कनेक्शन के साथ ही अन्य सुविधाएं कैसे मिल गईं। लोगों ने कहा कि लाखों रुपये मेहनत की कमाई लगाकर मकान बना लिया गया तो उसे तोड़ दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रॉपर्टी डीलरों ने उनको विश्वास दिलाया था कि कॉलोनी वैध है आगे कोई दिक्कत नहीं आएगी, उसी वजह से प्लॉट भी खरीदा था।
तहसीलदार राज बख्श के समय की है रजिस्टरी
बतातें हैं कि ये कॉलोनियां रिश्वत लेते पकड़े गए डीटीपी विक्रम सिंह व तहसीलदार राज बक्श के समय की हैं। दोनों अधिकारियों की गिरफ्तारी के समय ये राज खुला था कि दोनों मिलकर अवैध कॉलोनी बसाने वाले कॉलोनाइजरों से सांठगांठ करके कॉलोनी विकसित कराते थे और तभी रजिस्टरियां कर दी जाती थी।
गहने बेचकर बनाया था मकान
प्रदर्शन के लिए पहुंचे अरविंद कुमार ने कहा कि उन्होंने अपनी बीबी के गहने बेचकर सौ गज का मकान बनवाया और उसको तोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि वह मेमना के रहने वाले हैं। उनको हार्ट की समस्या है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन उनका मकान बनाकर दे, वरना वो कहां रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी मेहनत से बनाया गए मकान का मुआवजा प्रशासन दे।
बनते समय ही कॉलोनी को रोकते
इस प्रदर्शन में शामिल नीरज ने बताया कि जब कोई कॉलोनी बनाई जाती है तो जिला प्रशासन को खबर तक नहीं होती है। यदि कोई भी निर्माण हो रहा है तो जिला प्रशासन का कर्तव्य भी बनता है कि वह पहले ही सारी जांच करे। जिससे बाद में लोगों को कोई समस्या नहीं आ सके।
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