महात्मा गांधी पुण्यतिथि पर विशेष... फोटो ट्रैक पर
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म्हारी बेटियों ने दी जब गांधी को चरखा दंगल में चुनौती
- स्वतंत्रता सेनानी बैरिस्टर दुनी चंद की बेटियों विद्या और विजय के साथ की थी गांधी जी ने चरखा प्रतियोगिता
- चरखा कातने की कला देख दंग रह गए थे महात्मा, फिर पूरे हरियाणा में शुरू हुआ चरखा दंगल
मोहित धुपड़
करनाल। आज भले ही म्हारे प्रदेश का नाम कुश्ती-दंगल के खेल मुकाबलों में विश्व पटल पर चमक रहा है, मगर करीब 101 साल पहले हरियाणा (सन 1966 से पूर्व संयुक्त पंजाब का हिस्सा) में एक ऐसा दंगल भी हुआ था, जिसने देशभर के लोगों खासकर महिलाओं में देश की आजादी संग आर्थिक स्वतंत्रता की भी अलख जगा दी थी। यह था राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की चरखा प्रतियोगिता जिसे यहां ‘चरखा दंगल’ का नाम दिया गया।
गांधी जी कहते थे ‘तुम मेरे हाथ में खादी दो और मैं तुम्हारे हाथ में स्वराज्य रख दूंगा...।’ इसी सोच के साथ उन्होंने इस चरखा प्रतियोगिता की शुरूआत की। जिसे हरियाणा के अंबाला जिले में चरखा दंगल के नाम से आयोजित किया गया। 08 मार्च 1921 में यह चरखा दंगल अंबाला शहर में करवाया गया। इसके बाद येे संयुक्त पंजाब के विभिन्न जिलों में भी आयोजित हुआ। अंबाला में हुए इस दंगल में भाग लेने पहुुंचे महात्मा गांधी को स्वतंत्रता सेनानी बैरिस्टर दुनीचंद अंबालवी की बेटियों विद्या और विजय कुमारी ने चुनौती दी। जिसका जिक्र गांधी जी ने अपने एक लेख में किया है। हरियाणा के प्रख्यात इतिहासविद् डा. स्वर्गीय केसी यादव के इस संदर्भ में शोध दस्तावेजों में मौजूद पत्र के अनुसार यह प्रतियोगिता रात्रि 11 बजे शुरू हुई और कुछ घंटों तक चली।
इस पर गांधी जी ने कहा था कि ‘कताई की कला में देश भर में बहनें उत्कृष्ट हैं और मुझे विश्वास है कि वे हमेशा ऐसा ही करेंगी।’ उन्होंने कहा कि ‘दुनीचंद अंबालवी (बैरिस्टर) की दो बेटियों ने चरखा पर मेरे साथ प्रतिस्पर्धा की। उस वक्त मुझे लगा कि मेरे हाथ बस काम नहीं करेंगे, जैसे ही मैंने एक सूत काटा, वह टूट जाएगा, मगर ये लड़कियां यूं ही तेजी से सूत कातती ही चलती रहीं, जिसे देखकर उत्साह बनता था। उन लड़कियों के चरखे कातने के दौरान जो संगीत ध्वनि पैदा हो रही थ, वह भी बहुत मधुर थी और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि कोई वाद्य यंत्र बजा रहा हो। चरखा प्रतियोगिता की यह बाजी देर रात्रि कुछ घंटों तक चलती रही, लेकिन अगर मेरे पास करने के लिए कोई अन्य काम नहीं होता, तो मैं निश्चित रूप से चरखों को घुमाते हुए देखता रहता, क्योंकि मुझे विश्वास है कि भारत का स्वराज जीत जाएगा और चरखा दिन-ब-दिन बढ़ता जाएगा।’
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चार मील तक गांधी जी के स्वागत मेें खड़े थे लोग
19 मई 1921 को गांधी जी का फिर अंबाला आना हुआ। इस बार वे अंबाला सिटी की अनाज मंडी में जनसभा के दौरान लोगों से स्वराज की लड़ाई में कूदने का आह्वान करने पहुंचे थे। गांधी जी ट्रेन से अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन उतरे, जहां उन्हें स्वतंत्रता सेनानी दुनीचंद अंबालवी और अन्य कांग्रेसी नेताओं ने रिसीव किया। कार के जरिए महात्मा गांधी अंबाला सिटी अनाज मंडी तक पहुंचे और इस दौरान चार मील तक उनका स्वागत करने के लिए लोग सड़क किनारे खड़े हुए थे। इस जनसभा में गांधी जी ने एक लंबा भाषण देते हुए लोगों में स्वतंत्रता संग्राम में बढ़चढ़कर हिस्सा लेने के लिए आगे आने को कहा।