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Karnal News: धरती पर नहीं पड़े कदम तो हर आंखें हुईं थी नम

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। आज से 22 साल पहले, एक फरवरी 2003 को जब करनाल की गलियों में पली बढ़ी कल्पना चावला अंतरिक्ष की 16 दिवसीय यात्रा से वापस धरती पर लौट रही थी तभी उसका यान कोलंबिया क्षतिग्रस्त हो गया।
वह हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़ गई। इस घटना की सूचना मिलने के बाद करनाल सहित पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई। करनाल की बेटी की स्मृतियां आज भी कर्णनगरी के कोने-कोने में दिखाई देती हैं।
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बताते हैं कि कल्पना चावला ने कोलंबिया में सवार होकर आखिरी बार 16 जनवरी, 2003 को अपनी 28वीं उड़ान भरी थी। अंतरिक्ष में 16 दिन सफलतापूर्वक बिताने के बाद चालक दल के छह अन्य सदस्यों के साथ कल्पना चावला धरती पर लौट रही है, उस दिन उसकी कामयाबी को लेकर करनाल में भी हर तरफ खुशी की लहर थी। भले ही वह अमेरिका में उतरने वाली थी, क्योंकि वह नासा के जरिये अंतरिक्ष में गई थी, लेकिन यहां भी हर कोई उसकी सुरक्षित धरती पर वापसी का इंतजार कर रहा था। लेकिन शायद कुदरत को कुछ और मंजूर था। बताया गया था कि शटल कोलंबिया के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते ही उसमें आग लग गई। इसके बाद तो दुनिया ने आग के गोले को ही धरती पर गिरते देखा। इस त्रासदी में सभी की मौत को गई थी।
करनाल की बेटी भी हमेशा के लिए दुनिया छोड़ चुकी थी। इस खबर ने करनाल के लोगों को शोक संतप्त कर दिया था। एक फरवरी को उसकी यादें यहां के बाशिंदों की आंखों को आज भी नम कर देती हैं। इस दिन को नासा और दुनियाभर के अंतरिक्ष वैज्ञानिक दुखद दिन के रूप में याद करते हैं।
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करनाल में कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज भी उसके नाम पर बना है। डॉ. मंगलसेन ऑडिटोरियम में उसकी बड़ी तस्वीर हमेशा उसकी याद दिलाती है। अमेरिका में भी कई इमारतों, अंतरिक्ष यान और स्थलों का नाम उसके नाम पर रखा गया है।
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