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लॉकडाउन में काम नहीं चलने से थे परेशान, कर्मस्थल पर दी जान

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राकेश चौहान
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करनाल। सेक्टर-13 निवासी वरिष्ठ वकील विजय चोपड़ा के भाई और परिजनों की मानें तो लॉकडाउन में काम नहीं चलने के कारण वह परेशान चल रहा था। यही कारण है कि मंगलवार को सुबह सैर की जगह वह कोर्ट परिसर स्थित अपने चेंबर में पहुंचा और अपने कर्मस्थल पर ही लाइसेंसी रिवाल्वर से अपनी जीवनलीला समाप्त कर दी। परिजनों की मानें तो खुद और परिवार की सुरक्षा के लिए उसने रिवाल्वर का लाइसेंस कराया था, जिससे अपनी जान दे दी।
परिजनों के अनुसार प्रतिदिन विजय चोपड़ा सेक्टर-12 पार्क में टहलने के लिए जाते थे। मंगलवार की सुबह भी रोजाना की तरह वे घर से निकले। तब परिजनों को इसका आभास नहीं था कि यह विजय चोपड़ा की अंतिम सुबह होगी, लेकिन विजय चोपड़ा के दिमाग में मानों कोई तूफान उठ रहा था, जिसने उन्हें आत्मघाती कदम के लिए मजबूर कर दिया। आत्महत्या की वजह क्या है, यह तो जांच के बाद ही सामने आ सकता है, लेकिन परिजनों के अनुसार लॉकडाउन में काम नहीं चलने के कारण अधिवक्ता विजय चोपड़ा काफी परेशान चल रहे थे। शायद यही कारण था जो उन्हें अपने चेंबर तक खींच लाया और यहां आकर उन्होंने खुद को लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली मार ली।
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घटना की जानकारी मिलने पर न सिर्फ परिजन बल्कि साथी वकीलों की आंखों में भी आंसू आ गए। लोगों की मानें तो विजय चोपड़ा हंसमुख और मिलनसार व्यक्ति थे, लेकिन न जाने कौन से वजह थी जिसने उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया। उनके अभियंता भाई राजेश चोपड़ा भी आंखों के आंसू को रोक नहीं सके। उनका कहना था कि भाई ने अगर उनसे समस्या साझा की होती तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता।
रात में हुई थी बात, सुबह आई मनहूस खबर
बड़े भाई राजेश चोपड़ा ने बताया कि सोमवार देर शाम करीब 7 बजे सेक्टर-13 में वह भाई विजय चोपड़ा के घर पर ही थे। पिता केहर सिंह भी उनके साथ थे। तीनों ने बैठकर करीब डेढ़ घंटे तक बात की। इसके बाद उनका भाई उन्हें घर से बाहर कार तक छोड़ने भी आया, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि सुबह ऐसी मनहूस खबर आएगी जो हमेशा के लिए भाई से दूर कर देगी।
दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
बता दें वकील विजय चोपड़ा मूल रूप से ब्राह्मण माजरा के रहने वाले थे। इनके दो बच्चे हैं। बड़ा बेटा अखिल जो बीकॉम कर रहा है तो वहीं बेटी भूमिका भी पढ़ाई कर रही है। पिता केहर सिंह चोपड़ा के साथ वह घर में रहते थे। बड़े भाई राजेश चोपड़ा नहरी एवं सिंचाई विभाग में एक्सईएन हैं। दोनों बच्चों व विजय चोपड़ा की पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है।
-विजय चोपड़ा बहुत ही अच्छे व्यक्ति थे। सभी के साथ हंस कर बातें करते थे। उनके जाने से भारी क्षति हुई है। वे मानसिक रूप से परेशान थे तो उन्हें एक बार किसी साथी या घर के किसी सदस्य से बात बतानी चाहिए थी। आत्महत्या करना किसी समस्या का हल नहीं है। विजय चोपड़ा के जाने का परिजनों के साथ ही सभी वकीलों को भी दुख है, इस कारण ही उन्होंने पूरा दिन वर्क सस्पेंड रखा।
-कंवरप्रीत सिंह, प्रधान जिला बार एसोसिएशन, करनाल।
विजय चोपड़ा के मौत की 10 बजे सूचना मिली थी। वे अच्छे वकील के साथ ही बेहतर इंसान थे। समस्या के संबंध में दोस्तों और परिजनों से चर्चा करते तो शायद जान देने की नौबत नहीं आती।
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-भूपेंद्र सिंह राठौर, वरिष्ठ अधिवक्ता।
समस्या को अपने ऊपर हावी न होने दें
-जिस तरह अधिवक्ता विजय चोपड़ा ने खुद को गोली मारी है, उससे ऐसा लगता है कि वह काफी समय से बहुत परेशान थे। तभी उन्होंने ऐसा आत्मघाती कदम उठाया है। किसी भी स्थिति में व्यक्ति को समाधान का प्रयास करना चाहिए और समस्या को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। समस्या के बारे में अपनों और डाक्टरों से चरचा करनी चाहिए।
-डॉ. मन्नू गुुप्ता, मनोरोग चिकित्सक, नागरिक अस्पताल।
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