अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच फीस बढ़ोतरी व एडमिशन फीस का मुद्दा
गरमा गया है। दयाल सिंह स्कूल और शिक्षा विभाग में पत्र युद्ध चल रहा है।
एक तरफ स्कूल लेटर जारी करके फीस जमा न करवाने पर नाम काटने की चेतावनी दे
रहा है और दूसरी तरफ शिक्षा विभाग को नोटिस का जवाब देते हुए खुद को सही
साबित कर रहा है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल शिक्षा विभाग को गुमराह कर
रहा है।
आठ मई को जिला शिक्षा अधिकारी आशा मुंजाल की अध्यक्षता में
अभिभावकों व स्कूल प्रबंधन की बैठक हुई थी। इसमें कोई फैसला न आने पर स्कूल
प्रबंधन ने 21 मई तक का समय मांगा था। जिला शिक्षा अधिकारी व जिला मौलिक
शिक्षा अधिकारी ने आदेश दिए थे कि फैसला आने तक कोई भी स्कूल बढ़ी हुई फीस,
एडमिशन फीस व वार्षिक शुल्क नहीं लेगा और न ही अभिभावकों व बच्चों को फीस
के लिए तंग किया जाएगा। लेकिन इस स्कूल ने उसी दिन अभिभावकों को घर पत्र
भेजकर फीस भरने की चेतावनी दी।
शिक्षा विभाग को शिकायत कर दी
अभिभावक
एकता संघ के प्रधान दिनेश नरूला, आनंद मोहन, ललित व एससी जैन ने बताया कि
नौ मई को दयाल सिंह स्कूल ने बच्चों व अभिभावकों को लेटर जारी करते हुए फीस
जमा करवाने का दबाव बनाया था। नौ मई के बाद 16 व 17 मई को बच्चों को फिर
से पूरी फीस जमा करवाने लेटर थमा दिए। इसकी शिकायत 19 मई को जिला शिक्षा
अधिकारी को कर दी गई है। शिक्षा विभाग के आदेशाें की सरेआम उल्लंघना हो रही
है। स्कूल अपनी हठधर्मिता से बाज नहीं आ रहा है।
दयाल सिंह स्कूल ने रखा अपना पक्ष
दयाल
सिंह स्कूल को शिक्षा विभाग की ओर से 15 मई को कारण बताओ नोटिस जारी किया
था। इसका जवाब में उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी पर फीस के लिए दबाव नहीं
बनाया है। उन्होंने जवाब में लिखा कि वो लेटर उन अभिभावकों को जारी किया
गया था, जिन्होंने स्कूल के नियमों और हरियाणा शिक्षा विभाग के नियम के तहत
फीस जमा नहीं करवाई थी। स्कूल के जीएम एनके भंडारी ने बताया कि लगभग 94
प्रतिशत बच्चों ने फीस जमा करवा दी है। उन्होंने किसी भी अभिभावक को फीस के
लिए तंग नहीं किया है।