प्रदेश में आरक्षण के नाम पर हुई आगजनी और तोड़फोड़ के खिलाफ शुक्रवार को शहर के सभी बाजार, निजी और सरकारी संस्थान पूर्णरूप से बंद रहे। फ्रूट व सब्जियों तक की रेहड़ियां भी नदारद रही। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अर्धनग्न प्रदर्शन करते हुए शहर में विशाल जुलूस निकालकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सत्ता के दो मंत्रियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
एकता संघर्ष समिति की ओर से शहर को बंद करने के आह्वान का पूरा असर दिखाई दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सत्ता में बैठे दो जाट मंत्रियों की भी बर्खास्तगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नाम नायब तहसीलदार इंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा।
शुक्रवार को सुबह शहर के सैकड़ाें सामाजिक व व्यापारी एसडी मंदिर में एकत्रित हुए और काली पट्टी बांधकर आरक्षण के नाम पर प्रदेश में हुई आगजनी, लूटपाट व हिंसा की घटना के विरोध में प्रदर्शन शुरू किया। प्रदर्शन एसडी मंदिर से शुरू होकर तकिया बाजार, मंडी मनीराम, नई अनाजमंडी, मंडी दीपचंद, मुख्य बाजार, सर्विस लेन और अराईपूरा रोड से होता हुआ तहसील कार्यालय में पहुंचा।
प्रदर्शनकारियों के चेहरे पर गुस्सा साफ झलक रहा था और उन्होंने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित सत्तापक्ष के दो मंत्रियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आंदोलन के नाम पर प्रदर्शनकारियों ने सरासर गलत किया है। रेलवे ट्रैक व हाईवे को पूरी तरह से बंद कर दिया। इससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान उपद्रवियों ने लूटपाट जैसी घटनाओं को भी अंजाम दिया, जोकि निंदनीय है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने की प्रदेश सरकार से मांग की है।
पुलिस के खिलाफ की नारेबाजी
प्रदर्शनकारी जैसे ही घरौंडा थाना के सामने पहुंचे तो उनका गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के समय पुलिस ने उपद्रवियों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की। चालान काटने में पुलिस हर जगह तैनात रहती है। झगड़ा होने पर कहीं पर भी दिखाई नहीं देती।
शाम तक रहा बंद का असर
प्रदर्शनकारियों ने नई अनाजमंडी से निकलकर अर्धनग्न प्रदर्शन किया। दुकानों के साथ-साथ फूट, सब्जियों व चाय की दुकानें व रेहड़ियां पूर्णरूप से बंद रही। शाम तक किसी भी दुकानदार ने अपना प्रतिष्ठान नहीं खोला। प्रदर्शनकारी पूरे शहर में रोष मार्च निकालते हुए तहसील कार्यालय में पहुंचे और प्रदेश मुख्यमंत्री के नाम नायब तहसीलदार इंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा। इसमें जाटों को आरक्षण न देने, 10 लाख रुपये व सरकारी नौकरी न देने संबंधी मांग करते हुए उपद्रवियों से प्रदेश में हुई करोड़ों रुपये के नुकसान की भरपाई करने की मांग की।