करनाल। परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) डाटा सत्यापन प्रक्रिया को लेकर ग्राम सचिवों ने प्रशासन के सामने व्यावहारिक कठिनाइयों का मुद्दा उठाया है। इसी को लेकर जिले के सभी ग्राम सचिवों ने एडीसी राहुल राईया से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और प्रत्येक गांव में कम से कम पांच सदस्यीय कमेटी गठित करने की मांग की।
ग्राम सचिवों ने कहा कि पीपीपी के तहत परिवारों और उनके सदस्यों की जानकारी का मौके पर जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन करना एक अत्यंत विस्तृत और समय लेने वाली प्रक्रिया है। इसके लिए न केवल पर्याप्त समय बल्कि विभिन्न विभागों की तकनीकी विशेषज्ञता भी जरूरी है।
ग्राम सचिवों ने बताया कि कार्यालय से जारी आदेशों के तहत विशेष ग्राम सभाओं में पीपीपी डाटा का सत्यापन किया जाना है। लेकिन गांव स्तर पर प्रत्येक परिवार की आय, संपत्ति, संसाधन और व्यवसाय से जुड़ी जानकारी का मौके पर सत्यापन करना व्यवहारिक रूप से कठिन साबित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि केवल परिवार के सदस्यों से पूछताछ के आधार पर आय का सही आकलन संभव नहीं है। साथ ही, सभी परिवारों का अलग-अलग सर्वे करना ग्राम सचिवों के लिए अतिरिक्त कार्यभार बन रहा है, जिससे प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
ग्राम सचिवों ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि आय सत्यापन का अधिकार राजस्व विभाग के पास है, जबकि तकनीकी और डाटा संबंधी विशेषज्ञता सीआरआईडी के पास है। ऐसे में केवल ग्राम सचिवों पर यह जिम्मेदारी डालना उचित नहीं है।
पांच सदस्यीय कमेटी से हो सत्यापन
ग्राम सचिव राजेश, दिनेश सहगल और हरीश सहित अन्य ने सुझाव दिया कि प्रत्येक गांव में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया जाए। यह कमेटी परिवारों से संबंधित जानकारी एकत्र कर उसका प्राथमिक सत्यापन करे और उसके बाद डेटा ग्राम सभा में प्रस्तुत किया जाए। इससे प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और व्यावहारिक बन सकेगी। ग्राम सचिवों ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करते हुए जमीनी परिस्थितियों के अनुसार समाधान निकाला जाए, ताकि पीपीपी सत्यापन कार्य बिना बाधा के पूरा हो सके।