लॉकडाउन के दौरान हुई सब्जियों की दुर्दशा को देखते हुए किसानों ने सब्जियों को खत्म करके उसके स्थान पर धान लगा दिया। अब बारिश के दौरान बाहर से सब्जियों के आने में कमी आ गई है, जिसके कारण सब्जियों के भाव में दो से तीन गुना तक बढ़ोत्तरी हो गई है। रही सही कसर सब्जी विक्रेताओं ने पूरी कर दी है। यह कहना गलत नहीं होगा कि अधिक मुनाफे के चक्कर में सब्जी विक्रेता उपभोक्ता की जेब खाली कर रहे हैं।
सब्जी मंडी आढ़ती एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य कृष्ण लाल सचदेवा ने बताया कि पिछले दो महीनों के दौरान सब्जियों के भावों में दो से तीन गुना तक बढ़ोत्तरी हो गई है। मंडी में तो सब्जियां थोक के भाव ही बिकती हैं, यहां से थोक में ले जाने के बाद सब्जी विक्रेता फुटकर में किस भाव बेचते हैं, यह तो उनकी मर्जी पर निर्भर करता है। लेकिन मंडी में कंपटीशन रहता है, इसलिए कोई भी सब्जी अधिक मंहगी नहीं बेची जा सकती है। महंगाई का एक बड़ा कारण बारिश में बाहर से सब्जियों का न आ पाना तो है ही, लेकिन मुख्य कारण यह है कि लॉकडाउन के दौरान सब्जियों की इतनी बेकद्री हुई कि किसान की लागत भी नहीं लौटी। यह देखते हुए किसानों ने सब्जियों को स्वयं ही नष्ट कर दिया या फिर औने पौने दामों पर बेचकर खेतों को खाली करके उसमें धान लगा दिए। अब सब्जियों की कमी के कारण भाव बढ़ गए हैं।
सब्जियों के भावों में प्रति किलो बढ़ोत्तरी
सब्जियां- 27 जून (थोक), 27 अगस्त (थोक), 27 अगस्त (फुटकर)
-टमाटर -10 से 15 -30 से 40 -40 से 60
-भिंडी -8 रुपये -18 रुपये -35 रुपये
-तोरी -8 रुपये -25 रुपये -30 रुपये
-खीरा - 5 से 8 -25 से 30 -35 से 45
-गोभी -20 रुपये -50 रुपये -60 रुपये
-करेला -8 रुपये -25 रुपये -35 रुपये
-मूली -10 रुपये -25 रुपये -30 रुपये
-घिया -5 से 7 -18 से 22 -50 से 60
-टिंडा -25 रुपये -60 रुपये -70 रुपये
-अरबी -22 रुपये -22 रुपये -30 रुपये
-आलू -22 रुपये -24 रुपये -40 रुपये
-प्याज -10 रुपये -18 रुपये -20 रुपये