फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अल्टीमेटम : 30 अगस्त तक तीनों मांगें नहीं मानी तो रोड़ समाज के गांवों में भाजपा के नेताओं को नहीं घुसने देंगे

विज्ञापन
बैठक में मौजूद रोड समाज के लोग समाज
विज्ञापन
करनाल। हर्ष और बीरबल मुठभेड़ प्रकरण में रोड़ समाज की 101 सदस्यों की कमेटी ने प्रदेश की भाजपा सरकार को अल्टीमेटम दे दिया है कि अगर 30 अगस्त तक उनकी तीनों मांगें नहीं मानी गईं तो एक सितंबर से समाज के बाहुल्य वाले गांवों में भाजपा के नेताओं को घुसने नहीं दिया जाएगा। रोड़ समाज की धर्मशाला में बुधवार सुबह 10 बजे से लगभग तीन घंटे चली मैराथन बैठक में यह फैसला भाजपा के पूंडरी के विधायक सतपाल जांबा और कई पदाधिकारियों की मौजूदगी में लिया गया। कमेटी ने भाजपा नेताओं से कहा कि वे लोग समाज का फैसला सरकार तक पहुंचा दें। अगर सरकार ने उनकी नहीं सुनी तो उनका भी विरोध किया जाएगा।
विज्ञापन

क कमेटी ने मांगें दोहराते हुए कहा कि मुठभेड़ की जांच उच्च न्यायालय के जज की अध्यक्षता में कमेटी गठित कमेटी या केंद्रीय जांच ब्यूरो ( सीबीआई) से कराई जाए। इस प्रकरण में गलत बयानबाजी के लिए भाजपा के करनाल के विधायक जगमोहन आनंद रोड़ समाज से माफी मांगें। तीसरी मांग मुठभेड़ में शामिल अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की है। सरकार ने इस मामले की जांच स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंपी है। कमेटी ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस जांच पर समाज को भरोसा नहीं है। अल्टीमेटम देने से पहले कमेटी ने विधायक जांबा, कैथल के जिला परिषद अध्यक्ष कर्मवीर और भाजपा के प्रदेश सचिव रवि बतान और रोड़ समाज से आने वाले अन्य भाजपा नेताओं के साथ लंबी बातचीत की।

अखिल भारतीय रोड़ महासभा के अध्यक्ष बलकार सिंह ने बताया कि मीटिंग में विधायक जांबा ने कहा कि एक सितंबर तक विधान सभा का सत्र चलेगा। इसे देखते हुए मांगें पूरी होने के लिए कुछ वक्त दिया जाना चाहिए। इस पर 30 अगस्त तक की मोहलत दी गई। इसके बाद स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई कि एक सितंबर से सभी भाजपा नेताओं का खुला विरोध होगा। जो नेता रोड़ समाज से ही हैं, उन्हें भी गांवों में घुसने नहीं दिया जाएगा।
विज्ञापन




सवाल - मांगें नहीं मानी गईं तो क्या करोगे विधायक जी

जवाब - प्रदेश कहें तो आज ही पद से इस्तीफा दे दूंगा

रोड़ समाज की बैठक में विधायक सतपाल जांबा और भाजपा के पदाधिकारियों से कमेटी के सदस्यों ने सवाल भी किए। एक सदस्य ने विधायक से पूछा, आप सरकार तक समाज की मांगें पहुंचा देंगे न ? जवाब मिला, बिल्कुल पहुंचा दूंगा जी। इसके बाद एक सदस्य ने कुछ तीखा सवाल दागा, अगर सरकार हमारी मांगें नहीं मानती हैं तो क्या आप अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। यह सुनकर विधायक खड़े हुए और माइक हाथ में लिया। उन्होंने जवाब दिया कि अगर प्रधान जी ( बलकार सिंह ) कहें तो आज ही इस्तीफा दे दूंगा लेकिन तुम्हारे कहने से नहीं दूंगा। कमेटी के सदस्य परमजीत ने कहा, रोड़ समाज के 90 फीसदी वोट भाजपा को मिलते हैं। विधान सभा में हमारे समाज के विधायक हैं जिन पर हमें गर्व है। विधायक जांबा से अनुरोध है कि सदन में आवाज उठाएं। अगर सरकार आपकी भी न सुने तो भाजपा का विरोध करें। हम आपको फिर से विधायक चुन लेंगे। इंद्र सिंह, शमशेर सिंह और अंशुल चौधरी ने भी कहा कि राजनीति से ऊपर उठकर इस मामले में सभी नेताओं को समाज का साथ देना चाहिए ताकि मुठभेड़ का सच सामने आए।

विधायक को रैली नहीं रखनी चाहिए थी - बलकार
पत्रकारों से बातचीत में प्रधान बलकार सिंह ने कहा कि नीलोखेड़ी में सीएम की रैली क्यों स्थगित हुई, यह तो सरकार ही बता सकती है। हो सकता है रैली अल्टीमेटम के भय में रद्द की गई हो। नीलोखेड़ी के भाजपा विधायक भगवानदास कबीरपंथी ने रैली 30 अगस्त की रैली रखवाकर जनभावनाओं का अपमान किया। फर्जी मुठभेड़ में मारा गया हर्ष नीलोखेड़ी क्षेत्र के ही काला माजरा गांव का था। रोड़ समाज के युवक के साथ अन्याय हुआ। क्षेत्र के लोगों में गुस्सा है। ऐसे में विधायक को रैली रखनी ही नहीं चाहिए थी। समाज के लोगों ने रैली होने पर सीएम का घेराव करने का एलान किया था। इसके बाद रैली स्थगित की गई। भाजपा ने इसकी वजह विधान सभा सत्र चलना बताई है।

पूरा मामला
करनाल में 5 अगस्त को बीरू वाल्मीकि की हत्या हुई। पुलिस ने अगले दिन हर्ष और बीरबल को मुठभेड़ में मार गिराया। दोनों को बीरू की हत्या में शामिल बताया। हर्ष रोड़ और बीरबल सैन समाज से था। रोड़ समाज के लोग मुठभेड़ को फर्जी बताकर सीबीआई या न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं। सरकार ने जांच स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंपी है। इससे लोग संतुष्ट नहीं है।
विज्ञापन

बैठक में मौजूद रोड समाज के लोग समाज

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें