एनडीआरआई ने पंजाब की बीटल , फ्रांस की अल्पाइन और स्विट्जरलैंड की सानेन बकरियों से तैयार की दोनों संकर नस्ल
देव शर्मा
करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) करनाल ने बकरी की दो और संकर नस्ल तैयार की हैं। नई नस्लों को अल्पाइन बीटल और सानेन बीटल नाम दिया गया है। बीटल पंजाब की नस्ल है जबकि अल्पाइन फ्रांस और सानेन स्विट्जरलैंड की है। नई नस्लों का दुग्ध और मांस उत्पादन बीटल के मुकाबले ज्यादा है। जेनेटिक बदलाव करके दोनों नस्ल भारतीय जलवायु के अनुकूल बनाई गई हैं।
संकर नस्ल तैयार करने के लिए बीटल को चुनने की खास वजह रही। ऊंचे कद वाली इस बकरी का वजन ज्यादा होता है, इसलिए मांस उत्पादकता भी अधिक है। प्रजनन में यह आधी से ज्यादा बार जुड़वा बच्चे देती है। इसकी दुग्ध उत्पाकता थोड़ी कम है। एक दिन में (दोनों समय मिलाकर) ढाई लीटर दूध देती है। ऐसे में एनडीआरआई के वैज्ञानिकों ने इसकी दुग्ध उत्पादक क्षमता बढ़ाने के लिए संकर नस्ल तैयार की हैं। संकरण के लिए अल्पाइन और सानेन को इसलिए चुना गया क्योंकि दोनों की दुग्ध उत्पादकता बीटल से ज्यादा है। चुनौती यह थी कि संकर नस्ल भारतीय जलवायु सहनशील होनी चाहिए।
एनडीआरआई के निदेशक एवं कुलपति डॉ.धीर सिंह ने बताया कि कड़ी मशक्कत के बाद वैज्ञानिकों को इसमें सफलता मिली है। अल्पाइन बीटल और सेनन बीटल भारतीय जलवायु के अनुकूल हैं। सानेन बीटल नस्ल की बकरी शरीर के आकार में बीटल जैसी हैं, इसलिए मांस का उत्पादन ज्यादा है। बीटल के मुकाबले दूध भी ज्यादा मिलेगा। अल्पाइन बीटल एक दिन में तीन लीटर से अधिक दूध देगी। अल्पाइन का एक दिन का दुग्ध उत्पादन पांच से छह लीटर है लेकिन यह बकरी भारतीय जलवायु के अनुकूल नहीं है।
सानेन बीटल एक दिन में तीन से साढ़े चार लीटर दूध देती है। सानेन का प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन पांच से छह लीटर है लेकिन अल्पाइन की तरह ही यह भी भारतीय जलवायु के अनुकूल नहीं है। नई नस्ल तैयार करने के लिए कई जेनेटिक बदलाव किए गए हैं। जेनेटिक बदलाव से ही किसी नस्ल को क्षेत्र विशेष के लिए जलवायु सहनशील बनाया जाता है।
बढ़ जाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
एनडीआरआई का कहना है कि संकरण में अलग-अलग नस्ल की ताकत मिल जाती है, जिससे अनुवांशिक विविधता आती है। इस विविधता से विकास दर में तेजी, रोज प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि और अलग अलग पर्यावरणीय परिस्थिति में अनुकूलता आती है। बकरियों की नई संकर नस्लों में भी इस तरह के गुण मौजूद हैं। इनका पंजीकरण कराने की प्रक्रिया चल रही है।
बकरी की आबादी भारत में सबसे ज्यादा
- दुनिया में सबसे ज्यादा बकरियां भारत में ही है। बकरी से दुग्ध और मांस के उत्पादन में भी भारत सबसे आगे है।
- देश में हर साल बकरियों से 12.10 लाख टन मांस उत्पादन होता है, जो कुल मांस उत्पादन का 13.8 प्रतिशत है।
- देश में हर साल 62.60 लाख टन बकरी दूध होता है, जो कुल दुग्ध उत्पादन का चार प्रतिशत है।
- राजस्थान बकरियों की आबादी और दुग्ध उत्पादन में सबसे आगे है जबकि पश्चिमी बंगाल मांस उत्पादन में।
( आंकड़े पशुपालन एवं डेयरी विभाग से लिए गए हैं )