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उपचारित पानी 25 प्रतिशत सिंचाई, 75 फीसदी निर्माण कार्य व उद्योगों में होगा इस्तेमाल

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करनाल। गिरते भूजल स्तर से चिंतित प्रशासन की ओर से जल संरक्षण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत जिले की सभी औद्योगिक इकाईयों का सर्वे किया जाएगा, ताकि पता चले कि कौन सी इकाई कितना पानी इस्तेमाल करती है और कितना पानी व्यर्थ होता है। इसके अलावा उपचारित पानी के सदुपयोग के लिए भी योजना बनाई जा रही है।
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जिले में 200 से ज्यादा औद्योगिक इकाइयां चल रही हैं। वहीं 40 से ज्यादा अवैध कॉलोनियों में लोग सबमर्सिबल पंप से ही घरों में पानी आपूर्ति कर रहे हैं। जानकारों के अनुसार वर्ष 2000 से जलस्तर की स्थिति बिगड़ती चली गई। पंचकूला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, अंबाला व करनाल में स्थिति ज्यादा गंभीर है। करनाल में 15 फुट पर पानी था जो अब 45 फुट पर पहुंच गया है।
ऐसे में अब जिला औद्योगिक केंद्र की संयुक्त निदेशक की ओर से होने वाले सर्वे में ट्यूबवेलों की रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी। साथ ही उपचारित पानी का 25 प्रतिशत सिंचाई और 75 फीसदी पानी निर्माण कार्य व उद्योगों में इस्तेमाल करने की योजना है। इसके साथ ही बरसाती पानी का भी संचय करके फसलों में इस्तेमाल किया जाएगा। अवैध रूप से चल रहे सबमर्सिबल पंपों की भी जांच होगी।
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कल तक देंगे सरकारी विभाग पानी की खपत का ब्यौरा
सरकारी विभागों को पानी की खपत और जल संसाधनों का ब्यौरा देना होगा। उसी के आधार पर सरकारी कार्यालयों में भी जल बचाने की योजना तैयार की जाएगी। पिछले दिनों जल संरक्षण एवं प्रबंधन को लेकर हुई बैठक में उपायुक्त ने जिला जल संसाधन योजना के तहत विशेष रूप से हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, शहरी स्थानीय निकायों, शिक्षण व स्वास्थ्य संस्थान, वन विभाग, मत्स्य विभाग, पशुपालन विभाग, जन स्वास्थ्य विभाग, सिंचाई विभाग, कृषि, बागवानी, औद्योगिक क्षेत्र में प्रयोग होने वाले स्वच्छ पानी और गंदे पानी के प्रबंधन को लेकर ब्यौरा देने के निर्देश दिए थे। सोमवार तक इन विभागों को रिपोर्ट देनी है।
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