नगर निगम की ओर से पहले ग्रास टाइलें लगाई गईं और अब टाइलों को उखाड़कर उनके स्थान पर सौंदर्यीकरण के लिए पौधे लगाए गए हैं। पौधों पर निगम की ओर से करीब 46 लाख रुपये का बजट तय किया गया है। गंभीर बात ये है कि सड़क के सेंट्रल वर्ज (डिवाइडर) में पौधे लगाए जा रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किये जा रहे हैं। न तो पौधों पर ट्री गार्ड लगाए गए हैं और न सुरक्षा के अन्य प्रबंध किये गये हैं।
शहर के सौंदर्यीकरण को लेकर नगर निगम की ओर से दो एस्टीमेट तैयार किये गए। इनमें से एक सेक्टर-7,8 और 9 की मार्केट और साइड बर्म में पौधे लगाना शामिल है। इसके लिए निगम की ओर से 25 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार किया गया और इसका ठेका दे दिया गया। दूसरा मामला अग्रसेन चौक से लेकर आईटीआई चौक तक का है, यहां डिवाइडर के बीच में पौधे लगाने के लिए 21 लाख रुपये का बजट रखा गया है। कई स्थानों पर ठेेकेदार ने अपना कार्य पूरा भी कर दिया है, लेकिन अब इस पर लोग सवाल उठा रहे हैं। शहरवासियों का कहना है कि आनन फानन में इस कार्य को अंजाम दिया गया है। कई स्थानों पर तो ठेकेदार द्वारा पौधों की पालीथिन तक नहीं उतारी गई और टाइल को उखाड़ कर उसे रख दिया गया। इसी कारण बारिश का सीजन होने के बावजूद कई स्थानों पर पौधे चालू नहीं हो पाए और सूख रहे हैं। दूसरा पौधों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया। ऐसे में सड़कों पर आवारा घूमने वाले पशु इन पौधों को खा रहे हैं। सेक्टर-7 समेत तमाम सड़कों का यही हाल है।
कहां जा रही हैं टाइलें
सवाल ये है कि नगर निगम की ओर से कुछ माह पहले सेक्टरों में लाखों रुपये खर्च कर सेंट्रल वर्ज को टाइलों से पाट दिया गया। पहले यह कार्य इंटरलाकिंग टाइलों से किया गया था, इससे जमीन में पानी नहीं जा सकता था। बाद में इनके स्थानों पर ग्रास टाइलें, (इनके अंदर पानी जाने के लिए सुराग होता है) लगाई गई। बाद में निगम द्वारा पौधे लगाने के लिए अब इन ग्रास टाइलों को उखाड़ा जा रहा है और इनके स्थानों पर पौधे लगाए जा रहे हैं। सवाल ये है कि जो टाइलें उखाड़ी जा रही हैं, वे आखिर जा कहां रही हैं?
एक साल तक ठेकेदार रहेगा जिम्मेदार : एक्सईएन
इस बारे में नगर निगम के हार्टिकल्चर विभाग के कार्यकारी अभियंता नरेश त्यागी का कहना है कि अभी ठेकेदार द्वारा पौधे लगाए गए हैं। जितने पौधे लगाए गए हैं, बिल उन्हीं का तैयार होगा, साथ ही अभी तक ठेकेदार को पेमेंट नहीं की गई है। पौधों की देखरेख के लिए एक साल की शर्त रखी गई है, अगर कहीं पर कोई पौधा खराब हो गया है या फिर उसे कोई पशु खा गया तो ठेकेदार को लगाना होगा।
कोई खामी है तो दुरुस्त कराएंगे : पार्षद
वार्ड 9 के पार्षद मुकेश अरोड़ा इस मामले में कुछ भी कहने से बचते नजर आए। अरोड़ा ने कहा कि, अभी वे व्यस्त हैं और कहीं पर कोई खामी है तो उसे दुरुस्त कराया जाएगा।
नहीं मिली कोई शिकायत : डीसी
इस बारे में डीसी व निगम के आयुक्त निशांत कुमार यादव का कहना है कि इसको लेकर अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर शिकायत आती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।