अगर सब कुछ योजनानुसार रहा तो जल्द ही नेशनल हाईवे-44 पर रोड क्रास करने के लिए जान जोखिम में नहीं डालनी पड़ेगी। फुट ओवरब्रिज (एफओबी) से लोग सड़क पार कर सकेंगे। डीसी निशांत कुमार यादव के निर्देश पर सोमा कंपनी ने अधूरे फुट ओवरब्रिज के काम को पूरा करना शुरू कर दिया है। 15 दिनों में तीनों एफओबी का काम पूरा होने का अनुमान है।
वर्ष 2009 में नेशनल हाईवे को सिक्स लेन करने का काम शुरू हुआ था। हाईवे के आस-पास के लोग आसानी से रोड क्रास कर सकें, इसके लिए फुट ओवरब्रिज बनने थे, लेकिन 10 साल से इनका काम अधूरा पड़ा था। अधिकारियों की लापरवाही के कारण यहां कई हादसे हुए, अमर उजाला ने भी अधूरे एफओबी का मुद्दा कई बार उठाया। विशेषज्ञों के अनुसार, एनएच पर होने वाले कुल हादसों में 20 प्रतिशत की वजह ये अधूरे एफओबी भी माने गए।
जनवरी में हुई बैठक में डीसी ने दिए थे निर्देश
अमर उजाला के मुद्दों पर संज्ञान लेते हुए 13 जनवरी को हुई रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक में डीसी ने एनएच और सोमा कंपनी के अधिकारियों को अधूरे एफओबी का काम पूरा करने के निर्देश दिए थे। नवंबर माह में नेशनल हाइवे की खामियों को उजागर करते हुए अमर उजाला ने अभियान चलाया था, इसी माह हुई बैठक में एडीसी अनीश यादव ने भी अधिकारियों को काम करने के निर्देश दिए। लेकिन दिसंबर माह में हुई बैठक में जब जिम्मेदारों से काम का जवाब मांगा जाना था, तो एडीसी ने मीडिया से बचते हुए बंद कमरे में रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक कर औपचारिकता पूरी की थी।
यहां पर है लगने हैं फुटओवर ब्रिज
नेशनल हाइवे पर तरावड़ी में रंबा मोड, कर्णश्वर मंदिर और कंबोपुरा गांव के पास फुट ओवरब्रिज का काम अधूरा है। इसके लिए लोहे के ब्रिज और सीढ़ी भी रखी हुई है, लेकिन इन्हें लगाया नहीं गया। ऐसे में इनके सर्विस लेन में पड़े रहने से हादसे भी हुए।
इसलिए फुटओवर ब्रिज जरूरी
हाईवेे पर अक्सर गाड़ियों की रफ्तार काफी तेज होती है। ऐसे में सड़क पास करना किसी जोखिम से कम नहीं। रोड सेफ्टी विशेषज्ञों के अनुसार पूरे हाईवे पर स्थिति यह है कि हर माह औसतन पांच लोग सिर्फ इसलिए वाहनों की चपेट में आकर दम तोड़ते हैं, क्योंकि उनके पास रोड पार करने के लिए फुट ओवरब्रिज नहीं है।
जनवरी माह में हुई रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक में सोमा कंपनी को एक माह में तीनों एफओबी का काम पूरा करने के निर्देश दिए थे। काम शुरू हो गया है। 15 दिनों में तीनों एफओबी शुरू हो जाएंगे।
-निशांत कुमार यादव, डीसी करनाल।