रिश्वतखोरी के मामले में 25 जनवरी को पकड़े गए कुंजपुरा थाना के प्रभारी सहित तीनों कर्मचारियों को गुरुवार को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से कोर्ट ने तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया है हालांकि इस मामले में विजिलेंस लिपिक के अलावा किसी और से पैसे बरामद नहीं कर पाई। लिपिक के गिरफ्तार होने के बाद शुक्रवार को चकबंदी विभाग के निदेशक ने भी लिपिक पर कार्रवाई करते हुए उसे सस्पेंड कर दिया।
कुंजपुरा थाना के प्रभारी कुलदीप सिंह व सहायक उप निरीक्षक राकेश की मुश्किलें और बढ़ सकती है क्योंकि जिन लोगों से दोनों ने पहले भी रिश्वत ली है। उनमें कुछ लोगों की फोन कॉल भी विजिलेंस टीम के पास आई है। टीम द्वारा लोगों को दोनों के खिलाफ लिखित में शिकायत मांगी है ताकि कार्रवाई की जा सके।
यह है मामला
गांव मोहदीनपुर में दो किसानों के बीच फसल काटने को लेकर विवाद हुआ था। जिसमें एक किसान ने इसकी शिकायत कुंजपुरा थाना में की थी। वहीं जमीन की चकबंदी के लिए चकबंदी कार्यालय में अर्जी दी थी। इस मामले में कुंजपुरा थाना प्रभारी व सहायक उप-निरीक्षक ने मिलीभगत करके पीड़ित किसान के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी थी। इसी मामले में जमीन की चकबंदी के लिए जो शिकायत किसान के खिलाफ आई थी, उसकी जांच चकबंदी विभाग का लिपित यानी क्लर्क सतबीर सिंह कर रहा था। इसके बाद कुंजपुरा थाना प्रभारी कुलदीप सिंह और एएसआई राकेश ने क्लर्क सतबीर सिंह के साथ मिलकर रिश्वत मांगी थी। जिसकी शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने यह कार्रवाई की।
केस खारिज करने को मांगे थे 80 हजार
विजिलेंस इंस्पेक्टर सचिन कुमार ने बताया कि दोनों पक्षों में जमीन का कुछ हिस्सा उनकी महिलाओं के नाम था। इस मामले में एक पक्ष के लोगों ने दूसरे पक्ष के खेत से फसल काट ली थी। इसी मामले को खारिज करने की एवज से थाना प्रभारी व एएसआई ने पीड़ित किसान से 80 हजार रुपये की डिमांड थी। जिसके सबूत विजिलेंस को पीड़ित किसान ने दिए और उन्हीं के आधार पर दोनों को बुधवार देर शाम को कुंजपुरा थाने से गिरफ्तार किया गया था। इसी मामले में पीड़ित किसान के खिलाफ चकबंदी कार्यालय में शिकायत आई हुई थी। उस शिकायत को खारिज करने के लिए विभाग के क्लर्क सतबीर ने किसान से चार लाख रुपये की डिमांड की। जिसके चलते आरोपी द्वारा पहली 50 हजार रुपये की किस्त मांगी गई। जिसे विजिलेंस ने उसे रंगेहाथों गिरफ्तार किया था।
रिश्वतखोरी मामले में तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया था। जहां से कोर्ट ने तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं लिपिक को चकबंदी विभाग ने सस्पेंड कर दिया है।
- सचिन कुमार, इंस्पेक्टर, स्टेट विजिलेंस ब्यूरो, करनाल