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ये आकाशवाणी है...कभी था सुनहरा दौर, वक्त के साथ बदली रेडियो की आवाज

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। देश में रेडियो के प्रसारण को 102 वर्ष पूरे हो चुके हैं। रेडियो में श्रोताओं की फरमाइश को प्रसारित होने का ये 101वां वर्ष है। एक जमाना था, जब रेडियो पर प्रसारित होने वाले विशेष बुलेटन का हर बुद्धिजीवी को इंतजार रहता था। गीत माला युवाओं की पहली पसंद थी। कृषि से लेकर राजनीति तक की चर्चा रेडियो के साथ चौपालों पर होती थी। हर दिन बढ़ती तकनीक के इस दौर में रेडियो पीछे छूट गया, लेकिन अब भी इसके श्रोताओं की कमी नहीं है।
अब रेडियो श्रोता एक साथ बैठकर अपना सुखदुख भी साझा करते हैं। भारत में ब्रिटिश राज के बीच रेडियो प्रसारण 1920 के दशक में शुरू हुआ, लेकिन 20 अगस्त 1921 को एक श्रोता की पहली फरमाइश पढ़ी गई थी, यही कारण है कि इसी दिन को रेडियो श्रोता दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी की मन की बात कार्यक्रम ने एक बार फिर से रेडियो की लोकप्रियता को अहमियत दी है। देश में रेडियो श्रोता दिवस मनाने का सिलसिला 2006 से शुरू हुआ। इस बार रेडियो श्रोता दिवस का कार्यक्रम करनाल स्थित सारस्वत ब्राह्मण भवन में मनाया जा रहा है।
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समय के साथ आया बदलाव
मनोरंजन के रूप में ग्रामोफोन और फिर रेडियो के जादू ने सभी को अपना दीवाना बना लिया, लेकिन उस समय के रेडियो काफी भारी भरकम होते थे। जिसके लिए घर में एक स्थान सुरक्षित कर दिया जाता था। इसी बीच शुरू हुए रेडियो सिलोन के प्रसारण ने इसका दायरा काफी हद तक बढ़ा दिया। इसके बाद प्रायोजित कार्यक्रम और विज्ञापन भी शुरू हो गए। मुंबई से ऑल इंडिया ब्रॉडकॉस्टिंग कंपनी शुरू हुई, लेकिन सिलोन की लोकप्रियता को देखते हुए ऑल इंडिया रेडियो ने नए तरीके अपनाए। तीन अक्तूबर 1957 को विविध भारती शुरू हुआ। इसके बाद रेडियो का आकार छोटा हुआ। रेडियो घरों से निकलकर हाथों में आ गया। अब रेडियो मोबाइल फोन में भी उपलब्ध है। यही कारण है कि रेडियो बनाने वाली कंपनियां भी नया प्रयोग कर रही हैं, रेडियो में एफएम व चिप के सहारे गाने सुनने की सुविधा भी उपलब्ध हो गई है।
रेडियो का इतिहास
रेडियो का आविष्कार इटली के वैज्ञानिक मारकोनी ने 1880 में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों की खोज व 1890 में वायरलेस टेलीग्राफ की खोज के बाद 1896 में किया था। 24 दिसंबर 1906 को कनाडा के वैज्ञानिक रेगिनाल्ड फेसेंडेन के वॉयलिन की तरंगों को अटलांटिक महासागर में तैरते जहाजों के रेडियो ऑपरेटरों ने उन्हें सुना तो दुनियां में हंगामा मच गया। यही दुनिया में रेडियो का पहला प्रसारण था। 1918 में ली द फोरेस्ट ने न्यूयॉर्क में हाईब्रिज इलाके में दुनिया के पहले रेडियो स्टेशन की शुरुआत की थी। लंबे समय तक दुनिया के कई देशों के वैज्ञानिकों ने रेडियो के आविष्कार और प्रसारण प्रणाली में सहयोग दिया है। 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाया जाता है। भारत में 1957 में ऑल इंडिया रेडियो का नाम बदलकर आकाशवाणी किया गया। भारत में रेडियो की शुरुआत 1920 के दशक में मानी जाती है।
यूं तो 2006 से हर साल 20 अगस्त को रेडियो श्रोता दिवस देश के अलग-अलग हिस्सों में मनाया जाता है, इस बार ये कार्यक्रम हरियाणा के करनाल शहर स्थित सारस्वत ब्राह्मण भवन में सुबह 10 बजे से मनाया जाएगा। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से रेडियो श्रोता पहुंच रहे हैं, उनके रहने व खाने की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर की गई है। पहले सत्र का शुभारंभ 95 वर्षीय रेडियो श्रोता फूलपति देवी मान द्वारा किया जाएगा। इसमें देश के जाने माने रेडियो उद्घोषक भी सहभागिता कर रहे हैं।
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- ज्ञान भूषण शर्मा, अध्यक्ष अखिल भारतीय रेडियो श्रोता सम्मेलन
एक समय था, जब हर कोई रेडियो सुनता था, लेकिन समय के साथ तकनीकी बदलाव के कारण रेडियो का प्रसारण कम हुआ है। 20 अगस्त 1921 को एक श्रोता की पहली फरमाइश रेडियो पर प्रसारित हुई, जिससे श्रोताओं का सीधा जुड़ाव हुआ। छत्तीसगढ़ में सबसे पहले 2006 में इसी दिन श्रोता दिवस मनाए जाने की शुरुआत की गई थी, तब से यह सिलसिला चल रहा है। इस बार करनाल में मनाया जा रहा है। यहां करीब 250 से अधिक पुराने श्रोता पहुंच रहे हैं।
- अनिल कटारिया, महासचिव अखिल भारतीय रेडियो श्रोता सम्मेलन
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