करनाल। रोडवेज के स्क्रैप की ई-नीलामी में गड़बड़ी सामने आई है। वर्कशाप से दो क्विंटल स्क्रैप की बजाय कबाड़ी की गाड़ी में 33 क्विंटल लोड पाया गया। 37 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से अतिरिक्त मिले 31 क्विंटल स्क्रैप की कीमत 1.14 लाख रुपये बताई जा रही है। मामला उजागर होने के बाद महाप्रबंधक ने वर्कशाप मैनेजर से जवाब तलब किया है।
दरअसल ई-नीलामी के माध्यम से महज दो क्विंटल स्क्रैप बेचना दर्शाया गया, लेकिन इसे लोड करने के बाद जब अचानक छह सदस्यीय कमेटी ने जांच की तो गड़बड़ी सामने आई। मामले में रोडवेज की कर्मचारी यूनियनों ने मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बिना किसी कर्मी और अधिकारी की मिलीभगत के कोई कबाड़ी इतना अतिरिक्त स्क्रैप गाड़ी में नहीं लोड कर सकता है। उन्होंने मामले में जांच करते हुए दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं जीएम कुलदीप सिंह ने मामले पर तुरंत संज्ञान लेते हुए वर्कशाप मैनेजर को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। स्क्रैप में बसों की सर्विस के बाद जो पुर्जे या अन्य सामान निकलता है वह शामिल है। इनमें कुछ चीजें वजन और कुछ चीजें प्रति पीस के हिसाब से नीलाम की जाती हैं। ब्यूरो
ये है प्रक्रिया
नियम के अनुसार, स्क्रैप ई-नीलामी करके बेचा जाता है। नीलामी की शर्तों के अनुसार थोड़ा सा अतिरिक्त लोड किया जा सकता है लेकिन इतना ज्यादा स्क्रैप गाड़ी में पाया जाना गलत है। जीएम ने बताया कि छह सदस्यीय कमेटी की निगरानी में ई-नीलामी और स्क्रैप बेचने की प्रक्रिया होती है। वजन धर्मकांटा पर किया जाता है। पहले खाली गाड़ी तोली जाती है, फिर स्क्रैप लदने के बाद वजन होता है।
यूनियन सदस्य बोले, पीतल और तांबा लोहे के भाव क्यों बेचा
हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन के प्रधान सुरेश कश्यप, हरियाणा रोडवेज महासंघ के प्रधान कालाराम, चालक संघ के महासचिव कर्मबीर नरवाल और जागृति मंच के सचिव राजबीर का कहना है कि यदि कमेटी के सदस्य न पकड़ते तो यह चोरी हो जाती। उनका आरोप है कि ऐसा मिलीभगत से हुआ है। उन्होंने कहा कि स्क्रैप में पीतल, तांबा, लोहा, सिल्वर सब मिक्स है लेकिन इसका भाव लोहे के हिसाब से हुआ है। जबकि पीतल, तांबा और सिल्वर का रेट इससे ज्यादा है।
दो दिन पहले 23 बैटरी ज्यादा ले जाने का आरोप
कर्मशाला में केवल एक क्विंटल तक वजन तोलने की सुविधा है। यहीं से ही वजन किया जाना चाहिए, गाड़ी बाहर क्यों जाती है। यूनियन के नेताओं ने आरोप लगाया कि दो दिन पहले खराब बैटरियों को भी ऐसे ही बेचा गया था। उस समय भी गाड़ी में 43 बैटरी लोड थी, जबकि 20 बैटरी की बोली हुई थी। यूनियन के नेताओं ने 23 बैटरी गाड़ी से उतरवाई थी।
वर्जन
मामला मेरे संज्ञान में आया तो तुरंत कमेटी के सदस्यों को जांच के लिए भेजा गया। एकाउंट अफसर राजकुमार ने गाड़ी की जांच की है तो वजन ज्यादा पाया गया। ऐसा क्यों हुआ इसे लेकर वर्कशॉप मैनेजर को नोटिस जारी करके जवाब मांगा गया है। - कुलदीप सिंह, जीएम, रोडवेज