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कुली कर रहे वाटरमैन हेल्पर कर रहे फीटरमैन का काम

Fri, 23 Dec 2016 12:43 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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कुली कर रहे वाटरमैन हेल्पर कर रहे फीटरमैन का काम - फोटो : अमर उजाला
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कंडम हो चुके करनाल शुगर मिल में इंजीनियरों की अथाह मेहनत के बाद गन्ने की पिराई तो शुरू हो चुकी है, लेकिन मिल के ऊपर से संकट के बादल अभी भी छटें नहीं हैं। इसका कारण है मिल में अनट्रेंड कर्मचारियों का टेक्निकल पदों पर काम करना। मिल प्रबंधन इन अनट्रेंड कर्मचारियों के बल पर ही मिल को चलाने की कोशिश कर रहा है।
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वॉटर मैन, फीटर जैसे सभी टेक्निकल और अहम पदों पर गैर तकनीशियनों को तैनात किया गया है। इससे मिल में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। हाल ही में इसी कारण मिल में एक बड़ा हादसा हो भी चुका है। यहां पर कुली के तौर पर काम करने वाले एक कर्मचारी को वॉटरमैन का काम सौंपा गया था। इस कुली की गलती से मिल का बॉयलर फटते-फटते बचा।

अगर बॉयलर को समय पर बंद नहीं किया गया होता तो मिल को भारी जानमाल का नुकसान उठाना पड़ता। इस हादसे के बाद मिल प्रबंधन ने वॉटरमैन को सस्पेंड और एक इंजीनियर को चार्जशीट करके अपनी कमियों पर पर्दा डाल दिया। वहीं, मिल कर्मचारियों के अनुसार इस हादसे का जिम्मेदार चीफ इंजीनियर को बनाया जाना चाहिए।
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क्योंकि वे ही अनट्रेंड कुली से वॉटरमैन का काम करा रहे थे। कर्मचारियों ने बताया कि मिल में वॉटर मैन, फीटर जैसे कई अहम पदों पर अब भी अनट्रेंड डेलीवेजेज कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। इनमें से कुछ ऐसे भी हैं जो लगातार टेक्निकल पदों पर काम करते हुए ट्रेंड हो चुके हैं, लेकिन कई ऐसे हैं जो सिर्फ अंदाजे से मशीनों को ठीक करते हैं। इन अनट्रेंड मिल कर्मचारियों के कारण भविष्य में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। मिल प्रबंधन द्वारा वॉटरमैन को सस्पेंड किए जाने से यहां के कर्मचारियों में भी रोष पनपन रहा है।

एक हजार की जगह सिर्फ 400 कर्मचारी
40 साल पहले 1976 में करनाल शुगर मिल जब शुरू हुआ था, तब मिल को चलाने के लिए एक हजार कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। लेकिन धीरे-धीरे कर्मचारी रिटायर्ड होते गए और कामगारों की संख्या कम होती गई। अब यहां पर डेलीवेजेेज, सीजनल और रेगुलर कर्मचारियों को मिलाकर सिर्फ 400 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। इसमें डेलीवेजेज कर्मचारियों की संख्या 80 और सीजनल कर्मचारियों की संख्या 250 है। बाकि 80 के करीब रेगुलर कर्मचारी हैं। जिसमें से इस माह 13 कर्मचारी रिटायर होंगे। मिल में पहले जो कार्य होता था, वही अब भी हो रहा है, लेकिन अब एक हजार कर्मचारियों का कार्य सिर्फ 400 कर्मचारी ही संभाल रहे हैं।

कुली वॉटरमैन और हेल्पर फीटर का देख रहे काम
मिल में मशीनों को चालू रखने का काम इस समय पूरी तरह से कुली और हैल्परों के हवाले है। करनाल शुगर मिल में वॉटरमैन के चार पद हैं सभी पदों पर कुली को वॉटरमैन के तौर पर तैनात किया गया है। मिल में वॉटरमैन का काम बॉयलर की देखरेख कर उसे ठंडा रखना होता है। वॉटरमैन के पद पर आईटीआई पासआउट को रखा जाता है। लेकिन इस समय यहां पर वॉटरमैन का पद कुली संभाल रहे हैं।

जिनका काम सामानों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना होता है। इसी तरह मिल में मशीनों की मेंटिनेंस और देखरेख करने के लिए फीटर के 9 पद हैं। यह भी टेक्निकल पोस्ट है। लेकिन मिल में फीडर का काम देख रहे 9 में से 8 हेल्पर हैं जो डेलीवेजेज पर मिल में तैनात हैं और फीटर का काम देख रहें हैं। मिल के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि टेक्निकल विभाग में काम कर रहे ज्यादातर कर्मचारी डेलीवेजेज के अनट्रेंड कर्मचारी हैं। इस कारण कभी भी मिल में बड़ा हादसा हो सकता है।

बॉयलर खराबी वाले केस में मेरा कोई दोष नहीं है। कुली पहले से ही वॉटरमैन की पोस्ट पर काम कर रहा था। अगर इनडिपेंडेंट इंक्वायरी होगी तो दूध का दूध और पानी का पानी अपने आप साफ हो जाएगा। मुझे जो कर्मचारी दिए गए हैं मैं उन्हीं से काम चला रहा हूं।
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- विजय पाल सिंह, चीफ इंजीनियर, शुगर मिल, करनाल
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