सीएम सिटी में स्थित कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है। यहां अल्ट्रासाउंड से लेकर अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करना मरीजों के लिए मुसीबत बन गया है। दो दिन से अल्ट्रासाउंड को भटक रही गर्भवती महिलाओं का गुस्सा मंगलवार को चरम पर पहुंच गया। महिलाओं ने करीब एक घंटे तक सिविल अस्पताल रोड पर रास्ता रोके रखा। जाम से वाहनों की लंबी कतारें लग गई और लोग परेशान हुए। गर्भवती महिलाओं ने स्वास्थ्य अधिकारियों सहित सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
जाम की सूचना मिलने पर सिविल लाइन थाना प्रभारी प्रतीक कुमार मौके पर पहुंचे और महिलाओं के साथ डॉक्टर से बातचीत कर समाधान करवाने का आश्वासन दिया। अस्पताल से समाधान न होने पर पुलिस परेशान महिलाओं को डीसी ऑफिस ले गई। डेढ़ घंटे तक लघु सचिवालय में विरोध जताया और एडीसी गिरीश अरोड़ा ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बातचीत करके उनके प्राइवेट केंद्र से अल्ट्रासाउंड करवाने के निर्देश दिए। सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक विरोध जताया और चार बजे तक सभी गर्भवती महिलाआें के अल्ट्रासाउंड करवाए गए।
अस्पताल में डॉॅक्टरों की कमी
अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण मरीज परेशान हैं। मंगलवार को अल्ट्रासाउंड करवाने पहुंची एक दर्जन से ज्यादा महिलाएं अल्ट्रासाउंड न होने के कारण मायूस नजर आई। विरोध जता रही बबली, गीता देवी, सुमन, अनीता, रजनी, संगीता ने बताया कि सोमवार को भी वो सीटीएम से मिली थी, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया। अल्ट्रासाउंड न होने की समस्या कोई नई समस्या नहीं है।
पिछले कई महीनों से अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करने वाला डॉक्टर ही नहीं है। गर्भवती महिलाओं को पिछले कई महीनों से ऐसे ही धक्के खाने पड़ रहे है। महिलाओं ने डॉक्टरों के छुट्टी पर चले जाने और अल्ट्रासाउंड न होने के कारण तंग आकर आखिर में मेडिकल कालेज एवं अस्पताल के सामने सड़क के बीचोबीच बैठकर जाम लगा दिया। जाम साढ़े दस बजे से साढ़े 11 बजे तक रहा।
सुबह से भूखी हैं, सुनने वाला कोई नहीं
डॉक्टर से बातचीत करने के बाद समस्या का समाधान न होने पर थाना प्रभारी के साथ डीसी कार्यालय पहुंची। डीसी न मिलने के कारण गर्भवती महिलाएं कई घंटे बैठी रही। महिलाओं ने कहा कि वह सुबह से भूखी हैं, लेकिन उनका दुखड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। एडीसी ने अस्पताल प्रशासन के साथ बातचीत करके समस्या का समाधान करने की बात कही। सभी महिलाएं अस्पताल जाकर डॉक्टर से मिली। इसके पश्चात अस्पताल प्रशासन ने सभी महिलाओं के प्राइवेट केंद्र से अल्ट्रासाउंड करवाए।