खालसा कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. पुष्पिंद्र कौर की संदिग्ध डेंगू की वजह से मौत हो गई। वह करीब 56-57 साल की थी। कुछ दिन पहले ही वह बीमार हुई थी। उन्हें करनाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
शरीर में ब्लीडिंग की वजह से उन्हें रेफर कर दिया गया, जहां मोहाली स्थित फोर्टिस अस्पताल में उनकी मौत हो गई। उनकी मौत की खबर से परिवार के साथ साथ शिक्षा जगत के लोगों में गमगीन माहौल है। इधर कॉलेज में भी मातम पसरा है। मॉडल टाउन में रहने वाली पुष्पिंद्र कौर का शिवपुरी माडल टाउन में अंतिम संस्कार किया गया।
गौरतलब है कि करनाल में डेंगू के डंक से अब तक दर्जनभर मौतें हो चुकी हैं। यह बात और हैं कि सरकारी आंकड़े में एक आध मौत का ही जिक्र है। प्रशासन डेंगू से निपटने में पूरी तरह नाकाम रहा है। इससे पहले पूर्व मंत्री मीना मंडल व अन्य की भी डेंगू से मौत हो चुकी है। बता दें कि डॉ. पुष्पिंद्र कौर के पति की मौत भी छह माह पहले दुर्घटना में हुई थी। परिवार के लोग इस दुख से उबरे भी नहीं थे कि डा. पुष्पिंद्र कौर की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है।
अब कम आ रहे मरीज
सरकारी अस्पताल के आंकड़ों की बात करें तो करीब 209 लोग डेंगू पॉजिटिव पाए गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सर्दी बढ़ने के कारण अब डेंगू के मरीज न के बराबर आ रहे हैं। जबकि एक माह पहले तक रोजाना दर्जनों की संख्या में मरीज पहुंच रहे थे। डॉक्टरों ने बताया कि एक एक दिन में बुखार के केस 400 से भी ज्यादा तक आए हैं, लेकिन अब मेडिसन विभाग की ओपीडी काफी हद तक कम हो गई है।