कैथल और जींद रोड के बीचोंबीच बने लिंक बाईपास के नजदीक ठेकेदार द्वारा खुदाई के बाद पुलिया न बनाने के कारण आवागमन बाधित हो रहा है। लोगों के आवाजाही के लिए लकड़ी की चाली रखकर रास्ता तो बना लिया, लेकिन यह ऐसा है कि इस पर शव भी पार नहीं कर सका। चाली पर पैर फिसलने के कारण शव खोदे गये गड्ढे के पानी में जा गिरा। बाद में जब एसडीएम को इसकी जानकारी हुई तो आनन-फानन में पुलिया बनायी गयी, जिसके बाद शव को निकालकर श्मशान ले जाया गया।
कैथल और जींद रोड के बीचोंबीच बने लिंक बाईपास के नजदीक से श्मशान जाने के लिए मुख्य रास्ता है। इसी रास्ते से क्षेत्रवासी अपने खेतों में भी जाते हैं। प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में लोगों की इस मार्ग पर आवाजाही रहती है, लेकिन फिलहाल यहां बनी पुलिया को तोड़कर असंध बाईपास का कार्य चल रहा है, जिसके लिए ठेकेदार ने पुलिया को तोड़कर खुदाई की है। ऐसे में श्मशान जाने के लिए शव को भी रास्ता नहीं मिल पा रहा है। मजबूरी में लोग लकड़ी की चाली डालकर खेतों में आवाजाही कर रहे हैं। प्रशासन और ठेकेदार की लापरवाही उस पर भारी पड़ गयी जब एक शव ले जाते समय पानी से भरे गड्ढे में गिर गया। बिहार के दरभंगा निवासी सुखदेव ने बताया कि उसका 23 वर्षीय बेटा राकेश बीमारी था। 23 जुलाई वह बेटे को लेकर नागरिक अस्पताल में गया था। जहां से करनाल भेज दिया। वहां भी डॉक्टरों ने इलाज करने के बजाए रोहतक रेफर कर दिया। रोहतक पहुंचते ही बेटे ने दम तोड़ दिया। रात करीब 11 बजे वह बेटे के शव को लेकर अन्य लोगों के साथ चाली के ऊपर से घर जा रहे थे। जहां पैर फिसलने से शव पानी में गिर गया। जब इसकी जानकारी प्रशासन को हुई तो नपा अधिकारियों ने पाइप रखकर जेसीबी की सहायता से रास्ता बनवाया। इसके बाद जन सेवा दल की सहायता से संस्कार करवाया गया। एसडीएम अनुराग ढालिया ने कहा कि जिस ठेकेदार ने पुलिया उखाड़ने के बाद यह रास्ता ऐसे ही छोड़ दिया है। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।