संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल/घरौंडा। नई अनाज मंडी में श्री शिव महापुराण कथा में कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के प्रवचन सुनने के लिए श्रद्धालु लगातार उमड़ रहे हैं। मंगलवार को प्रवचन करते हुए उन्होंने चंद्रमा का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे चंद्रमा सुख देखकर बढ़ता और दुख देखकर घटता है, वैसे ही मनुष्य को भी दूसरों का भला करने का प्रयास करना चाहिए। यदि किसी का भला न कर सकें तो कम से कम किसी का बुरा भी नहीं करना चाहिए। उन्होंने समाज में बढ़ती ईर्ष्या पर चिंता जताते हुए कहा कि आज के समय में रिश्तों में भी प्रतिस्पर्धा और जलन बढ़ रही है, जिससे बचना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भगवान कभी मनुष्य के कपड़े या बाहरी रूप को नहीं देखते, बल्कि उसके मन के भाव और चरित्र को देखते हैं। इसलिए हर व्यक्ति को अपने मन के भाव सदा शुद्ध रखने चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस घर में सभी देवी-देवता विराजमान हों, लेकिन भगवान शिव का स्थान न हो, वहां पूजा अधूरी मानी जाती है। पंडित मिश्रा ने शिव को सृष्टि का पिता बताते हुए कहा कि संसार में हर प्राणी उनके ही माध्यम से आता है। अपने प्रवचन में उन्होंने जीवन की समानता का संदेश देते हुए कहा कि करोड़ों रुपये कमाने वाला व्यक्ति भी अंततः दो रोटी ही खाता है और भिक्षा मांगने वाला भी दो रोटी से ही अपना पेट भरता है। ठीक उसी प्रकार कथा पंडाल के अंदर बैठकर या बाहर बैठकर श्रवण करने वाले सभी श्रद्धालुओं को समान फल प्राप्त होता है।
नाकेबंदी से हो रही परेशानी
कथा के चलते पुलिस प्रशासन ने नई अनाज मंडी के आसपास यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए नाकेबंदी कर दी है। हालांकि इससे स्थानीय लोगों को अपने घरों तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि आसपास की कॉलोनियों में रहने वालों को आवागमन की अनुमति दी जाए।
एंबुलेंस को कैंप तक न जाने देने पर नाराजगी
कथा में पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए जेसीआई द्वारा लगाए गए मेडिकल कैंप तक एम्बुलेंस को न जाने देने पर संस्था के सदस्यों ने रोष जताया है। उनका कहना है कि कई बार श्रद्धालुओं की तबीयत खराब होने पर तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ता है, इसलिए एम्बुलेंस को कैंप तक पहुंचने की अनुमति मिलनी चाहिए।
घरौंडा की नई अनाज मंडी में चल रही श्री शिव पुराण कथा में प्रवचन सुनते श्रद्धालु। संवाद
घरौंडा की नई अनाज मंडी में चल रही श्री शिव पुराण कथा में प्रवचन सुनते श्रद्धालु। संवाद