संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। करवाचौथ का पर्व विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण होता है, वहीं नवविवाहित महिलाओं के लिए तो यह और भी खास है। पहली बार सोलह श्रृंगार में सजना, चांद की प्रतीक्षा करना और पति की लंबी उम्र की कामना करना यह सब उनके लिए भावनाओं से भरा अनुभव बन जाता है। कुछ महिलाएं मायके तो कुछ ससुराल में यह त्योहार मनाएंगी।
शहर की महिलाओं ने अपने पहले करवाचौथ की तैयारियों के बारे में बताया।
करवाचौथ पर पहनूंगी शादी वाला लहंगा
मैं अपना पहला करवाचौथ ससुराल में ही मनाऊंगी। हमारे घर में रिवाज है कि पहली बार करवाचौथ पर वही लहंगा पहना जाता है जो शादी के दिन पहना था। इसलिए मैंने अपना लाल रंग का शादी वाला लहंगा और पारंपरिक गहने पहले से ही तैयार कर लिए हैं। मैंने बचपन में मां को यह व्रत करते देखा था, लेकिन खुद के लिए करना एक अलग ही अहसास है। यह सिर्फ व्रत नहीं, बल्कि पति के प्रति अपने प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। वसंत बिहार निवासी भारती
मायके से आई सरगी ने बढ़ाई खुशी
मेरे मायके से एक दिन पहले सरगी आई है। बचपन से मां को यह रस्म निभाते देखा था, तब सोचती थी कि ये व्रत कितना सुंदर होता होगा। अब जब खुद करने जा रही हूं, तो मन में अजीब-सी खुशी और उत्साह है। ससुराल के सभी लोग बहुत खुश हैं, सब मेरी मदद कर रहे हैं ताकि मेरा पहला करवाचौथ यादगार बने। इसके अलावा करवाचौथ की पूजा के लिए विशेष रूप से लाल और गोल्डन रंग की साड़ी खरीदी है। शिव कॉलोनी निवासी कुसुम
मायके में मनाऊंगी पर्व
वसंत बिहार निवासी काजल बताती हैं कि उनके परिवार में एक खास परंपरा है कि हर बेटी अपना पहला करवाचौथ मायके में ही मनाती है। उन्होंने बताया कि परिवार के साथ त्योहार मनाने का अलग उत्साह होता है जिसमें सास ससुर मायके में सरगी लेकर आयेंगे जिसका मुझे काफी इंतजार भी था।