संवाद न्यूज एजेंसी
तरावड़ी। नई अनाज मंडी में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। कथा व्यास अनिरुद्धाचार्य महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। इसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए और पूरा पंडाल जय श्रीकृष्ण के उद्घोष से गूंज उठा।
कथा के प्रारंभ में भगवान श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग सुनाया गया। महाराज ने पूतना वध और यशोदा मैया के साथ बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने माखन चोरी, गोपियों के साथ रास और गो-प्रेम के प्रसंग भी सुनाए। कालिया नाग के मान मर्दन जैसे प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया। इन प्रसंगों के माध्यम से जीवन में धर्म, सत्य और भक्ति का महत्व समझाया गया। कंस का निमंत्रण मिलने पर भगवान श्रीकृष्ण अपने भाई बलराम के साथ मथुरा गए।
इस अवसर पर राकेश गुप्ता, पंकज गुप्ता, संजय गुप्ता, नरेश गुप्ता, नरेश बंसल, प्रमोद बंसल, कृष्ण चंद सिंगला, अनिल गुप्ता, राजकुमार तायल, राहुल गुप्ता, तिलक राज मक्कड़, शीशपाल गुप्ता, राकेश गर्ग, मदन लाल सचदेवा, विनीत बंसल, रोशन लाल गुप्ता, रणदीप चौधरी, राजीव नारंग, राधेश्याम गर्ग, यश सलूजा, अमित रहेजा, विजय गोयल, नरेश गर्ग और मंडी प्रधान सुभाष गुप्ता मौजूद रहे।
हर लीला देती है संदेश
अनिरुद्धाचार्य महाराज ने बताया कि श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला जीवन को दिशा देने वाला संदेश है। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को वैराग्य, ज्ञान और विचारशीलता प्रदान करती है। कलियुग में हरि नाम का स्मरण ही जीव के कल्याण के लिए पर्याप्त है। सच्चे मन से किया गया नाम-स्मरण मनुष्य को मोक्ष की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि कथा केवल सुनने का माध्यम नहीं है। यह जीवन परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण साधन भी है। इससे मनुष्य अपने आचरण पर विचार करता है और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ता है। आज मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में मानसिक शांति खो रहा है। ऐसे में भागवत कथा उसे अपने मूल संस्कारों और अध्यात्म से जोड़ती है। सत्संग और कथा से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। पंडाल में पूरे समय भक्ति गीतों और श्रीकृष्ण नाम की ध्वनि गूंजती रही। श्रद्धालुओं ने कथा को जीवन के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने इसे आध्यात्मिक ऊर्जा देने वाला आयोजन भी कहा।