संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। डिपो होल्डरों से रिश्वत लेने का यह सिलसिला बहुत पहले से चल रहा है। डिपो लेने के लिए लोगों को अंदर खाते रिश्वत देनी पड़ती है।
एक डिपो होल्डर के अनुसार राशन डिपो लेने के लिए एक से दो लाख रुपये की रिश्वत देनी पड़ती है। यदि किसी की सिफारिश है तो वह इस अवैध टैक्स से बच जाता है। इतना ही नहीं अधिकारी रिश्वत लेकर नियमों से परे भी डिपो दे देते हैं। ऐसा एक मामला नगला मेघा में भी सामने आ चुका है। जिसमें जिला खाद्य आपूर्ति विभाग के दो अधिकारी कप्तान व देवेंद्र चार्जशीट भी हो चुके हैं। इन अधिकारियों ने राशन कार्ड की संख्या कम होने पर भी नगला मेघा में तीसरा राशन डिपो खुलवा दिया था। इन मामलों में भी अधिकारियों पर लाखों रुपये लेने के आरोप लगे थे। इससे साफ है कि विभाग में राशन डिपो जारी करने से ही रिश्वत का सिलसिला शुरू हो जाता है जो फिर मंथली में बदल जाता है। जिसका खुलासा एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से पकड़े गए एएफएसओ राजेंद्र व निरीक्षक नीरज वधवा के माध्यम से हो चुका है। हालांकि सरकार ने डिपो लेने के लिए अब ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अधिवक्ता हरीश आर्य का कहना है कि डिपो होल्डर से रिश्वत लेने के मामले में खाद्य आपूर्ति विभाग के दो बड़े अधिकारी पकड़े गए हैं। यह मामला बड़ा है। ऐसे में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम को इसकी जांच गहनता से करनी चाहिए, आखिर यह रिश्वत के रुपये इनसे ऊपर किस-किस अधिकारी के पास जाते थे। क्योंकि विभाग के बड़े अधिकारी की मिलीभगत के बिना रिश्वत का इतना बड़ा खेल इतने लंबे दिनों से नहीं चल सकता। इस मामले में अन्य अधिकारी की भी मिलीभगत अवश्य मिलेगी।