माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के पशु आनुवंशिकी एवं प्रजनन प्रभाग की ओर से मुर्रा नस्ल सुधार नेटवर्क परियोजना के तहत कार्यक्रम आयोजित हुआ।
इस परियोजना में शामिल 25 गांवों के अनसूचित जाति के पशुपालकों को रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए प्रेरित किया गया। पशुपालकों को 20 लीटर दूध की कैन भी वितरित की गई। निदेशक ने आह्वान किया कि पशुपालक एनडीआरआई से जुड़कर परियोजनाओं का लाभ उठाएं।
एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने परियोजना में शामिल 25 गांवों के अनुसूचित जाति के पशुपालकों का आह्वान किया कि वह राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान की परियोजनाओं से ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाएं व अपने जीवन स्तर में सुधार करके रोजगार के अवसर पैदा करें। निदेशक ने कहा कि पशुपालन के क्षेत्र में यदि समूह बनाकर पशुपालन किया जाए तो उसमें विकास की अधिक संभावनाएं हैं। यदि ज्यादा दूध उत्पादन करेंगे तो गांव में समूह के रूप में एक चिलिंग सेंटर भी बना सकते हैं।
उससे पशुपालक पशुओं के दूध ज्यादा देर तक टिका भी रहेगा और मुनाफा भी ज्यादा होगा। पशु आनुवंशिकी एवं प्रजनन प्रभाग के अध्यक्ष डॉ. विकास वोहरा ने परियोजना के बारे में बताया व ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जुड़कर लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।