करनाल। हरियाणा बोर्ड या सीबीएसई की मान्यता के बिना अवैध रूप से चलने वाले ज्यादातर स्कूलों का संचालन ग्रामीण क्षेत्र या शहर की कॉलोनियों की तंग गलियों में हो रहा है। ऐसा इसलिए ताकि इन पर किसी अधिकारी की नजर न पड़े और ये पकड़ में न आ सकें।
तंग परिसर में चलने वाले इन स्कूलों में हादसा होने पर जान का जोखिम भी हो सकता है। क्योंकि न तो इनके मान्यता संबंधित नियम पूरे हैं और न सुरक्षा के इंतजाम हैं। आंकड़ों के अनुसार, बिना मान्यता के चलने वाले जिले के 107 स्कूलों में से 62 स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे हैं। इसके अलावा करनाल शहर के 21 स्कूल कॉलोनियों की गलियों में खुले हैं, जहां कोई बड़ा वाहन भी नहीं जा सकता। इन स्कूलों के संचालक अपने नजदीकी क्षेत्र के बच्चों को दाखिला देते हैं। इसके लिए फीस और किताबों में भी छूट का लालच दिया जाता है। लालच में आकर आर्थिक रूप से मध्यम या कमजोर वर्ग के अभिभावक इनके यहां बच्चों का दाखिला करा देते हैं।
शिक्षा सुधार में काम कर रहे एडवोकेट संदीप राणा का कहना है कि इससे भविष्य में बच्चों को आगे की पढ़ाई में परेशानी का सामना करना पड़ता है, अभिभावकों को जागरूक होना चाहिए।
इधर, जिला शिक्षा विभाग की ओर से ऐसे स्कूलों को सोमवार तक अपने दस्तावेज दिखाने की मोहलत दी गई है। कई स्कूलों का दावा है कि उनके पास मान्यता थी, लेकिन उनका रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं है। इसके अलावा कुछ स्कूल संचालकों का कहना है कि उनके स्कूल में सुरक्षा मानक पूरे हैं, मान्यता के लिए आवेदन भी किया है। ऐसे स्कूल संचालकों को विभाग ने दस्तावेज दिखाने की मोहलत दी है।
डीएवी स्कूल सेक्टर-13 और माउंट सिनाई स्कूल ने मान्यता संबंधी दस्तावेज शिक्षा विभाग को प्रस्तुत कर दिए हैं।
विदित हो कि 107 गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को विभाग ने चिह्नित किया है, शिक्षा निदेशालय और यू-डाइस पोर्टल पर भी इनकी मान्यता का कोई प्रमाण नहीं है। घरौंडा सहित चार खंडों के ज्यादातर स्कूल ग्रामीण ः जारी सूची के अनुसार, करीब 58 प्रतिशत स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हैं। इनमें सबसे ज्यादा घरौंडा खंड के 25 स्कूलों में से 21, निसिंग के 19 में से 17, नीलोखेड़ी के चार में से तीन और असंध के सभी तीन स्कूल ग्रामीण क्षेत्र के हैं। करनाल खंड की स्थिति देखें तो यहां 51 में से 16 स्कूल ग्रामीण क्षेत्र में हैं, अन्य स्कूल कॉलोनियों व गलियों में हैं।