माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। सतत डेयरी फार्मिंग विषय पर किसानों की आय में वृद्धि एवं ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 45 डेयरी किसानों ने भाग लिया। उनको अतिरिक्त आय के सुझाव दिए गए।
डॉ. पीके सारस्वत ने किसानों को वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि संतुलित आहार, वैज्ञानिक प्रजनन, उचित पशु आवास, प्रभावी स्वास्थ्य प्रबंधन एवं अपशिष्ट के कुशल उपयोग से उत्पादन लागत घटाकर शुद्ध लाभ में वृद्धि की जा सकती है। एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि वर्तमान परिदृश्य में बढ़ती उत्पादन लागत, जलवायु परिवर्तन, सीमित प्राकृतिक संसाधन, पशु रोगों की बढ़ती चुनौती और किसानों की आय में स्थिरता की आवश्यकता को देखते हुए डेयरी फार्मिंग का सतत स्वरूप अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।
डॉ. चिन्मयी साहू ने पशु उत्पादकता की वर्तमान स्थिति पर बताया कि बदलती जलवायु परिस्थितियां, चारे की अनिश्चित उपलब्धता एवं रोगों का बढ़ता जोखिम सतत उत्पादन प्रणाली अपनाने की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बनाते हैं। डॉ. रमेश चंद्र ने दुग्ध पशुओं के वैज्ञानिक आवास प्रबंधन पर जानकारी देते हुए पशु आराम, स्वच्छता एवं उचित वेंटिलेशन के महत्व को रेखांकित किया।
डेयरी अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर्गत अश्वनी कुमार की ओर से केवीके फार्म पर वर्मी-कम्पोस्ट इकाई का प्रदर्शन किया गया। डॉ. गोपाल गावणे, डॉ. सचिन कुमार, डॉ. उत्तम कुमार, डॉ. सोनिका अहलावत, दीपा कुमारी और डॉ. सोनिया, डॉ. राज कुमार ने भी जानकारी दी।