201ःनमी मापक यंत्र की जानकारी देते डा एसके पांडे।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का गन्ना प्रजनन संस्थान क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र करनाल जल संरक्षण अभियान के तहत किसानों को मृदा नमी सूचक यंत्र उपलब्ध करवाएगा। गन्ना प्रजनन संस्थान कोयंबटूर के वैज्ञानिकों की टीम ने पिछले साल यह यंत्र ईजाद किया है। इसकी मदद से खेत में तुरंत नमी की मात्रा ज्ञात हो जाती है। यह जांच करने के उपरांत किसान फसलों में अनावश्यक रूप से पानी नहीं लगाएंगे। जिससे जल की बचत होगी।
केंद्र के अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसके पांडे ने बताया, यह यंत्र बताएगा कि कब खेत में उपयुक्त नमी होने पर फसल की बिजाई करनी है। यह यंत्र सभी फसलों के लिए उपयुक्त है। किस फसल को सिंचाई की कब आवश्यकता है, यंत्र इसकी जानकारी देगा।
ऐसे होता है उपयोग
डॉ. पांडे ने बताया कि यह यंत्र थर्मामीटर की तरह काम करता है। इसमें स्टील की करीब नौ इंच लंबी दो रॉड लगी हैं, जिन्हें खेत में गाड़ दिया जाता है। यंत्र में कई तरह के एलईडी बल्ब लगे हैं। जिनके रंग की मदद से सिंचाई करने या न करने का संकेत मिलता है। नीला रंग सिंचाई नहीं करने का संकेत देता है। हरा रंग जलने पर तुरंत सिंचाई करने, नारंगी रंग नमी कम होने और लाल रंग का बल्ब जलने पर तुरंत सिंचाई करने का संकेत देता है।
जल शक्ति मंत्रालय से तकनीक को मिला पुरस्कार
डॉ. पांडे ने बताया कि इस वर्ष केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की ओर से आयोजित दूसरे राष्ट्रीय जल पुरस्कार कार्यक्रम में यंत्र को जल संरक्षण के क्षेत्र में प्रथम पुरस्कार मिला है। उन्होंने बताया कि संस्थान ने इसकी कीमत 1650 रुपये रखी है। किसानों को यह यंत्र 1500 रुपये में उपलब्ध होगा। इसे प्राप्त करने के लिए किसान गन्ना प्रजनन केंद्र में संपर्क कर सकते हैं।