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Karnal News: पराली के धुएं से शिशुओं में जन्मजात अस्थमा का खतरा

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- ओपीडी में पहुंचने वाली 200 में से 65 गर्भवतियों में मिल रहीं समस्याएं
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अनुज शर्मा
करनाल। पराली के धुएं के कारण गर्भवतियों को ही नहीं बल्कि उनके गर्भ में पल रहे शिशु को जन्मजात अस्थमा होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। आंकड़ों की बात करें तो जिला नागरिक अस्पताल के स्त्री रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में रोजाना 200 से अधिक गर्भवतियां जांच कराने पहुंच रही हैं। इनमें से लगभग 60-65 गर्भवतियों में इसका असर देखने को मिल रहा है।
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जिला नागरिक अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपा सरदाना ने बताया कि पराली के कारण मौसम में वायु प्रदूषण के प्रभाव में आने वाली गर्भवतियों के साथ गर्भ में पल रहा बच्चा भी इसके असर में आ जाता है। कुछ मामलों में गर्भ में पल रहा बच्चा अस्थमा से भी पीड़ित हो सकता है। यह भी संभव है कि बच्चा जीवन भर फेफड़ों की समस्या से ही पीड़ित रहे। उन्होंने बताया कि इसका मुख्य कारण प्रदूषण के कारण गर्भवतियों के गर्भ में पल रहे शिशु तक पर्याप्त ऑक्सीजन न पहुंचना है। वहीं कई मामलों में गर्भवती भी अस्थमा की शिकार हो सकती हैं। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान अस्थमा की दवा लेना खतरनाक होता है। इसके अलावा वायु प्रदूषण के कारण गर्भपात होने व समय से पहले डिलीवरी होने का खतरा बना रहता है।
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वायु प्रदूषण का गर्भवतियों व शिशुओं पर असर-
- वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से गर्भवती महिलाओं में उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ जाता है।
- गर्भ में पल रहे बच्चे का वजन कम हो सकता है।
- बच्चे का जन्म समय से पहले हो सकता है।
- बच्चे में जन्मजात विकृतियां हो सकती हैं।
- बच्चे में अनुचित प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित हो सकती है।
- बच्चे में कम संज्ञानात्मक बुद्धि हो सकती है।
- बच्चे में अस्थमा जैसी दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
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