माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पराली प्रबंधन पर कृषि तथा किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक वजीर सिंह ने बताया कि बेलर मशीन से अपने व आस पास के खेतों में पराली की गांठें बनाकर उद्योगों को बेचकर फसल अवशेष प्रबंधन कर रहे हैं और अतिरिक्त आय कमा रहे हैं।
जिले में धान की फसल 4.25 लाख एकड़ में रोपित की जाती है जिसमें से अब तक लगभग 65 प्रतिशत धान की कटाई हो चुकी है। करनाल में अभी तक पराली जलाने के कुल पांच मामले सामने आये हैं। पांचों किसानों पर एफआईआर दर्ज करवाई जा चुकी है। साथ ही पांचों किसानों पर नियमानुसार 30 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल रिकॉर्ड में रेड एंट्री कर दी गई है जिससे ये किसान अगले दो सीजन अपनी फसल पोर्टल पर नहीं बेच पाएंगे। इस वर्ष अब तक पराली जलाने के मामले में 91 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है, पिछले वर्ष अभी तक पराली जलाने के 52 मामले सामने आए थे।
उन्होंने बताया कि जिला के प्रत्येक गांव में जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन और फसल अवशेष नहीं जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों का प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है । फसल अवशेष प्रबंधन करने पर किसान को विभाग द्वारा 12 सौ रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। प्रोत्साहन राशि पाने के लिए किसानों का मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण होना अनिवार्य है ।