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मंत्री जी, हम स्टेडियम को उजड़ने नहीं देंगे, यहां से पदक आएंगे

Sun, 04 Sep 2016 12:28 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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चर्चा करते हुए ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला
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मंत्री जी, ये स्टेडियम पूरे गांव ने अपने पैसे और पसीने से तैयार किया है, ताकि यहां से खिलाड़ी आगे निकल सके। हम इस स्टेडियम को उजड़ने नहीं देंगे, चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े। अगर यूं ही स्टेडियम खत्म होते रहे तो ओलंपिक में इस बार तो जैसे तैसे दो पदक आ गए, लेकिन आगे पदक की आस भी खत्म हो जाएगी। आप गांव का विकास ही करना चाहते हैं तो इस स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं दिला दीजिए, फिर देखिये ये खिलाड़ी एक दिन देश के लिए पदक ला सकते हैं।
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यह बातें गांव कुंजपुरा के पूर्व सरपंच महेंद्र सिंह, राजबीर कांबोज समेत गांव के अन्य लोगों ने इंद्री से विधायक और मंत्री कर्ण देव कांबोज को कही। शनिवार को कांबोज कुंजपुरा की मार्केट कमेटी में लोगों की समस्याएं सुनने पहुंचे थे। इस दौरान सरकारी स्कूल की जमीन पर ग्राम सचिवालय बनाने को लेकर चल रहे गतिरोध का मामला उठा। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने मंत्री को साफ कर दिया कि वे किसी भी सूरत में स्टेडियम के अंदर निर्माण नहीं होने देंगे। करीब आधे घंटे की मंत्री के साथ बैठक में माहौल काफी गर्म रहा। इस दौरान जहां कई बार मंत्री तल्ख हुए तो वहीं ग्रामीण भी पीछे नहीं हटे।

मंत्री के सामने ग्रामीणों ने भी कड़े तेवर दिखाए। ग्रामीणों द्वारा राजी नहीं होने पर मंत्री ने यहां तक कह दिया कि अगर स्कूल की जमीन पर बारात घर नहीं बनवाना है तो ये प्रोजेक्ट किसी दूसरे गांव में शुरू करा देंगे। आप लोगों को विकास नहीं कराना है तो मत कराइये। ग्रामीणों ने भी इसका कड़ा जवाब दिया। पूर्व सरपंच महेंद्र सिंह ने कहा कि हमें ऐसे प्रोजेक्ट की जरूरत नहीं है, जिससे गांव के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो।
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वहीं राजबीर कांबोज ने कहा कि ऐसा स्टेडियम दोबारा तैयार नहीं किया जा सकता है। अगर यहां पर निर्माण हुआ तो ट्रैक खराब हो जाएगा। इसलिए हम यहां पर कोई निर्माण नहीं होने देंगे। पूर्व सरपंच सुरेंद्र बब्बू ने कहा कि बारात घर के लिए दूसरी जगह जमीन तलाश की जा सकती है। हालांकि, गांव में स्टेडियम के अंदर ग्राम सचिवालय और बारात घर बनाने को लेकर दूसरा पक्ष भी ग्रामीणों के साथ पहुंचा था, उन्होंने भी मंत्री से मिलकर अपनी बात रखी।

अब दूसरी जमीन की तलाश
काफी गहमागहमी के बाद आखिरकार फैसला लिया गया कि गांव की पंचायत इसके लिए दूसरी जमीन दिखाएगी, अगर वह उसके लिए सही होगी तो स्टेडियम के अंदर बारात घर नहीं बनाया जाएगा। इसके लिए मंत्री ने गांव की सरपंच सविता के पति विजय और बीडीपीओ नरेश शर्मा की ड्यूटी लगाई। मंत्री ने कहा कि अगर दूसरे स्थान पर कोई अच्छी जगह है तो हम इसे वहां पर बना देंगे, लेकिन इसका लोगों को लाभ होना चाहिए। हमारा मकसद केवल लोगों की भलाई करना है। सरपंच के पति विजय ने बताया कि दो एकड़ जमीन पड़ी है, उस पर बारात घर बनाया जा सकता है। इसका प्रस्ताव बनाकर रेज्यूलेशन पास किया जाएगा।

यह है विवाद की जड़
दरअसल इस मामले को लेकर गांव में दो गुट बन गए हैं। एक पक्ष चाहता है कि स्टेडियम में ही ग्राम सचिवालय व बारात घर बने, लेकिन दूसरा पक्ष ऐसा नहीं चाहता है, जिस कारण यह प्रोजेक्ट लटका हुआ है। उधर, विवाद की असली जड़ कुछ और बताई जा रही है। शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि यह मामला जमीन का नहीं बल्कि मूछ का सवाल हो गया है। मंत्री यहां पर बारात घर बनाने की घोषणा कर चुके हैं, इसलिए वे इसे हर हाल में पूरा करना चाहते हैं। न तो इस मामले में मंत्री पक्ष पीछे हटने को तैयार है और न ही ग्रामीण। इस मामले में डीईओ द्वारा शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है, जबकि पंचायती राज विभाग जबरदस्ती इसी जमीन पर यह निर्माण कराने की कोशिश में जुटा है। पंचायती राज विभाग अपनी गलती सुधारने की बजाए मंत्री के माध्यम से यहीं पर निर्माण कराने की फिराक में है।

एजुकेशन डायरेक्टर के नाम है रजिस्ट्री
गौरतलब है कि गांव कुंजपुरा में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की पांच एकड़ जमीन है। इस जमीन पर समझौते के तहत पंचायत द्वारा खिलाड़ियों के लिए स्टेडियम तैयार कराया गया है। इसमें स्कूल के खेल भी होते हैं और गांव के खिलाड़ी भी खेलते हैं, इसकी देखरेख पंचायत करती है। उधर, पंचायती राज विभाग ने शिक्षा विभाग की बिना परमिशन के ही इस पर ग्राम सचिवालय का निर्माण शुरू कर दिया, जिसका ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। शिक्षा विभाग का कहना है कि बिना परमिशन के वे निर्माण नहीं होने देंगे, जबकि पंयाजती राज विभाग जमीन ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया तक शुरू नहीं करना चाहता, वह ऐसा क्यों नहीं कर रहा इसका किसी के पास जवाब भी नहीं है?

एकजुट हुआ गांव
शनिवार को गांव की सैकड़ों महिलाएं और सदस्य मार्केट कमेटी कार्यालय पहुंचे और मंत्री के सामने विरोध जाहिर किया। महिला बिमला देवी, कांता देवी ने बताया कि इस मैदान में केवल खिलाड़ी ही नहीं महिलाएं भी सैर करने आती हैं। इसे ऐसे खराब नहीं होने देंगे। अगर किसी ने यहां पर निर्माण किया तो वे स्टेडियम के अंदर बैठक जाएंगी। वहीं, ग्रामीण राजबीर सिंह ने बताया कि पूरे गांव से पैसा एकत्र करके ये स्टेडियम तैयार किया गया है। गांव के हर व्यक्ति का इसमें सहयोग है। इस स्टेडियम में दर्जनभर से ज्यादा गांवों के युवा तैयारी के लिए आते हैं। ऐसे में इसे उजड़ने नहीं देंगे। इस खेल मैदान में तैयारी करके कई युवा पुलिस और फौज में भर्ती हुए हैं, इसलिए यहां से कई बड़े खिलाड़ी भी तैयार हो सकते हैं। पूर्व सरपंच सरपंच महेंद्र सिंह ने मंत्री से कहा कि दूसरे स्थान पर बारात घर बनाया जाएगा। पूर्व सरपंच सुरेंद्र बब्बू व सुशील कुमार ने भी नए स्थान पर बारात घर कराने की बात कही है। मौजूदा सरपंच सविता के पति विजय कुमार ने बताया कि गांव वाले चाहते हैं कि बारात घर दूसरे स्थान पर बने, इसके लिए दूसरी जमीन तलाशी जा रही है।  

रुक गया ग्राम सचिवालय का निर्माण
आनन-फानन में दोबारा से स्टेडियम के अंदर दोबारा से ग्राम सचिवालय का निर्माण शुरू करा दिया। हालांकि, ग्रामीणों द्वारा विरोध जताने के बाद विभाग ने काम बंद करा दिया। आगामी आदेशों तक यह कार्य रोक दिया गया है और नई जमीन तलाशने में ग्रामीण जुट गए हैं। बता दें कि इससे पहले विभाग ने इसका निर्माण तेज कर दिया था। इस पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने चंडीगढ़ मुख्यालय और सीएम आफिस में इसकी शिकायत भेजी थी। इसके बाद से ही यह कार्य रोक दिया गया है।
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