रिकॉर्ड को व्यवस्थित करते कर्मचारी।
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नगर निगम अपने पुराने रिकार्ड को सुरक्षित करने के लिए गंभीर है। वर्ष 1916 के रिकार्ड को शाखा के हिसाब से अलग-अलग करके डिब्बों में बंद किया गया है, ताकि समय पर उनको चेक किया जा सके और वे खराब भी नहीं होंगे। शनिवार को सौ साल पुराने नगर निगम के रिकार्ड को निगम के कर्मचारियों ने चेक किया और उसे डिब्बों में पैक किया।
यह रिकार्ड नगर सुधार मंडल के भवन में रखा जा गया है। बता दें कि नगर निगम कार्यालय, जो कुछ वर्ष पूर्व नगर पालिका करनाल के नाम से स्थापित था, मेें प्रतिदिन सैकड़ों लोग अपने कार्यों के लिए जाते थे। कार्यालय की अलग-अलग शाखाएं होने के कारण बड़ी संख्या में फाइलें एकत्र होना स्वाभाविक थी। जो समय के साथ-साथ पुराने रिकार्ड के रूप में परिवर्तित हो गई। इनमें 1916 तक के उर्दू के रिकार्ड तक की फाइलें भी शामिल हैं। लेकिन फाइलों की अधिकता के कारण शाखाओं में रिकार्ड रखने की दिक्कतें भी बढ़ती चली गई, जिसका समाधान आज हो गया।
छुट्टी का दिन होने के बावजूद स्वयं आयुक्त और कार्यालय के तमाम कर्मचारी व अधिकारी प्रात: निगम परिसर में इकट्ठे हो गए। आयुक्त ने उन्हें पुराने रिकार्ड के रखरखाव के बारे में विस्तार से समझाया। रखरखाव भी ऐसा किया गया कि भविष्य में लंबे समय तक फाइलों में लगे दस्तावेज ज्यों के त्यों रहें। इस कार्रवाई में पहले शाखा अनुसार रिकार्ड को अलग-अलग रखा गया, फिर उन्हें गत्ते के बडे़ कार्टन में सलीके से रखा गया। बाक्स को बंद करके मार्कर से रिकार्ड के वर्ष व शाखा का नाम लिखा गया और फिर उसे लेमिनेट किया गया, ताकि मौसम के प्रभाव से अंदर रखा रिकार्ड सुरक्षित रहे और भविष्य में जरूरत पड़ने पर उसे निकालकर देखा भी जा सके।
रिकार्ड भी कोई कम नहीं पाया गया। इससे करीब 300 कार्टन भरे गए। निगम आयुक्त के अनुसार रिकार्ड के सारे कार्टन शहर के बीचोंबीच बने नगर सुधार मंडल के कार्यालय में रखे जाऐंगे, जहां पर्याप्त जगह है। जल्द ही वहां के स्टाफ को नगर निगम के कार्यालय में बैठने की जगह दी जाएगी, ताकि जनता की सुविधा के लिए एक ही भवन में सारे कार्य किए जा सकें। आयुक्त डॉ. आदित्य दहिया का कहना है कि स्वच्छ भारत अभियान में पहले अपने कार्यालय की सफाई जरूरी थी। शाखाओं में पुराने रिकार्ड को अलग करने से सफाई के साथ-साथ निगम कर्मियों को भारी भरकम रिकार्ड के तनाव से मुक्ति मिली है।