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Karnal News: शिविरों में नहीं हुआ समाधान, चक्कर काट रहे फरियादी

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करनाल। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरकार बनते ही स्थानीय निकायों और खंड विकास कार्यालयों में जिस मंशा को लेकर समाधान शिविरों की शुरुआत कराई, शायद उस मंशा को विभागीय कर्मचारी समझ नहीं पा रहे हैं। इन शिविरों में आने वाली शिकायतों का समाधान किया जा रहा है या फिर सिर्फ अभिलेखों में आंकड़े पूरे किए जा रहे हैं। इसकी जानकारी कुछ फरियादियों से बातचीत करने पर पता लगी। उन्होंने बताया समाधान शिविरों में शिकायतें देने के बाद भी उनका निस्तारण नहीं किया जा रहा और वह निगम आदि के चक्कर लगाने को विवश हैं।
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फरियादियों के अनुसार समाधान शिविर का रजिस्टर ही अलग हैं, इसमें वहीं शिकायतें अंकित की जाती हैं, जो या तो हल हो चुकी हैं या फिर तत्काल हल होने वाली हैं। उन शिकायतों को समाधान शिविर में शामिल ही नहीं किया जा रहा है, जो लंबे समय से निस्तारित नहीं हो रही हैं। यदि ऐसा है तो समाधान शिविरों में फरियाद देने का फायदा क्या है। शायद यही कारण है कि मंत्रियों, विधायकों, लघु सचिवालय आदि में तो शिकायतें पहुंच रही हैं लेकिन शतप्रतिशत समाधान का दावा करने वाले समाधान शिविरों से फरियादियों का मोह भंग हो रहा है।

एक से दूसरे पटल पर घुमा रहे कर्मचारी
- अल्फा सिटी के नितिन मदान बताते हैं कि उन्होंने पिछले बुधवार को समाधान शिविर में नगर निगम में प्रार्थना पत्र दिया था, जिसका पंजीकरण नंबर 0275208785 है। इसमें लिखा था कि अल्फा सिटी का प्लाट है, जिसकी रजिस्ट्री हो चुकी है, अब सिर्फ नाम परिवर्तित करने का अनुरोध किया गया था। शिविर में संंबंधित कर्मचारी ने अगली सुबह तक कार्य हो जाने को कहा था लेकिन तीन बार निगम जा चुका है, कई बार फोन भी किया लेकिन अभी तक कार्य नहीं हो सका है। कर्मचारी एक पटल से दूसरे पटल पर शिकायत को घुमा रहे हैं।
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निगम के चक्कर काटने को विवश
- अल्फा सिटी आरडब्ल्यूए के प्रधान प्रो.जोगिंद्र मदान ने बताया कि उन्होंने 24 अक्तूबर को समाधान शिविर में शिकायत दी थी, जिसके नंबर 55/एमसीके-35 है। इसमें शिकायत की गई थी, राजस्व रास्ते पर बिल्डर ने कब्जा कर रखा है, जिससे लोगों को दिक्कत हो रही है। ये प्रार्थना पत्र भी अभी तक निस्तारित नहीं हो सका है। कर्मचारी एक पटल से दूसरे पटल पर भेजते रहते हैं। शिकायतकर्ता ने बताया कि एक कर्मचारी ने दूसरे कर्मचारी से कहा कि शिकायत ऐसी थी तो पंजीकृत ही क्यों की। तात्पर्य ये है कि कर्मचारी उन्हीं शिकायतों को पंजीकृत करते हैं, जो निस्तारित होने वाली होती हैं।
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नहीं हटवाया अवैध निर्माण
- सुभाष गेट की कुसुम लता ने बताया कि उसकी शिकायत का भी छह महीने बाद भी निपटारा नहीं हुआ है। उनका कहना है कि उसके घर के पास एक अवैध निर्माण करा दिया गया है, जिसकी जानकारी निगम के अधिकारियों को भी है लेकिन अवैध निर्माण को हटाया नहीं जा रहा है। समाधान शिविर में दी थी लेकिन कोई नंबर नहीं दिया गया। अब उसने निगम के अधिकारियों की ही शिकायत निगमायुक्त से की है, बुधवार को भी निगमायुक्त से मिलने पहुंची थी लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी, क्योंकि निगमायुक्त किसी कार्य में व्यस्त थी।

एक सप्ताह बाद भी समाधान नहीं
- अल्फा सिटी की ललिता रानी ने बताया कि उन्होंने 13 नवंबर को समाधान शिविर में प्रार्थना पत्र दिया था, इसमें संपत्ति में मालिक का नाम परिवर्तन करने का अनुरोध किया गया था। रजिस्ट्री व अन्य अभिलेख भी दिए गए थे लेकिन 20 नवंबर को शाम चार बजे तक इस समस्या का समाधान नहीं किया गया है। शिकायत को ऑनलाइन पंजीकृत किया गया है, जबकि ये ऐसी शिकायत धी, जिसका मौके पर ही समाधान किया जा सकता था। कर्मचारी क्यों इन शिकायतों को लंबित रख रहे हैं, ये बात समझ में नहीं आ रही है।
शिविरों में आई 16 में 13 शिकायतों का समाधान का दावा
करनाल। बुधवार को भी नगर निगम कार्यालय, नगर पालिका कार्यालयों व बीडीपीओ कार्यालयों में समाधान शिविर लगे, जिनमें कुल 16 शिकायतें आईं। इनमें अधिकारियों की ओर से 13 शिकायतों का मौके पर ही समाधान करने का दावा किया गया है। नगर निगम करनाल कार्यालय में निगम आयुक्त डॉ. वैशाली शर्मा ने शिकायतों को सुना। यहां एक शिकायत आई, जिसका मौके पर ही समाधान कर दिया गया। नीलोखेड़ी, असंध और इंद्री नगरपालिका में आई एक एक शिकायत समाधान कर दिया गया। घरौंडा नगरपालिका कार्यालय में छह शिकायतें आईं, इन सभी का समाधान कर दिया गया। वहीं नगर पालिका तरावड़ी व निसिंग नगर पालिका कार्यालय में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई। बीडीपीओ कार्यालय करनाल में पांच शिकायतें आई, जिनमें से तीन शिकायतों का समाधान कर दिया गया है। घरौंडा बीडीपीओ कार्यालय में एक शिकायत प्राप्त हुई जो अभी लंबित है। अन्य बीडीपीओ कार्यालयों में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई।
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